मल्टी ब्रांडेड कंपनी अमूल के पैकेट बंद दूध में भी घटतौली मिली है। घूकना निवासी कैटरिंग का बिजनेस करने वाले राजकुमार ने जब 70 लीटर अमूल दूध के पैकेट लिए तो उसमें एक पैकेट का साइज 500 एमएल से काफी छोटा था।
जबकि पैकेट पर घोषणाएं और मूल्य 500 एमएल के पैकेट जैसी ही अंकित थी। अब पीड़ित इस घटतौली की शिकायत मापतौल विभाग के पास करेगा।
घूकना निवासी राजकुमार ने बताया कि वह कैटरिंग का बिजनेस करते हैं। बुधवार को भी उन्हें एक पार्टी के लिए खाना बनाना था। इसलिए उन्होंने जरूरत के हिसाब से 70 लीटर अमूल गोल्ड पैकेट बंद दूध खरीदा।
कर्मचारी जब पैकेट से दूध निकाल रहे थे तो एक पैकेट का साइज गड़बड़ मिला। यह पैकेट अन्य की तुलना में काफी छोटा था। जबकि उसके ऊपर घोषणाएं सही अंकित थीं। एक पैकेट का मूल्य 24 रुपये है।
कंपनी ने पैकेट का मूल्य पूरा लिया, लेकिन दूध पूरा नहीं दिया। यह घटतौली का मामला है। इसकी शिकायत मापतौल विभाग में करेंगे।
अमूल कंपनी के प्रदेश प्रभारी (सेल्स) बीआर गर्ग ने बताया कि टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी कि किस प्वाइंट पर गलती हुई है। यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दही में घटतौली पर एक लाख का जुर्माना
नामी कंपनी भी पैकेट बंद अपने उत्पाद में घटतौली कर रही है। विधिक माप विभाग ने एक कंपनी के 500 ग्राम के दही के पैकेट में 120 ग्राम की घटतौली पकड़ी है। कंपनी से एक लाख रुपये जुर्माना भी जमा कराया गया है।
मार्केट में नामी कंपनियां भी घटतौली करने में पीछे नहीं रहती। ग्राहक इन कंपनियों के उत्पादों पर विश्वास करते हैं। इसलिए पैकेट में घटतौली हो रही है या उन्हें पता नहीं होता।
विधिक माप विभाग के निरीक्षक हर्ष मिश्रा ने बताया कि बाजार में निरीक्षण के दौरान एक कंपनी के पैकेट बंद दही को चेक किया गया। दही का पैकेट 500 ग्राम का था।
जब उसकी जांच की गई तो उसमें 120 ग्राम कम दही पाया गया। यह बड़ी घटतौली थी। ग्राहक यदि पैकेट पर गौर न करें तो उन्हें भी पता नहीं चलेगा कि दही कम है।
विभाग ने संबंधित कंपनी को नोटिस भेजा। कंपनी ने अपनी गलती मानते हुए विभाग में एक लाख रुपये जुर्माना जमा करा दिया है।
कोका-कोला और हींज को आरसी जारी
जुर्माने की रकम जमा नहीं करने पर एडीएम प्रशासन ने कोका-कोला और कॉम्प्लान बनाने वाली कंपनियों को आरसी जारी की है।
कॉम्प्लान बनाने वाली मुंबई की कंपनी हींज और मेमर्स हिंदुस्तान कोका-कोला प्राइवेट लिमिटेड को वसूली पत्र डीएम ने भेजा है।
2014-15 में एक्सपायरी डेट की कोल्ड ड्रिंक बेचने पर एडीएम प्रशासन ने कोका-कोला पर 15 लाख का जुर्माना ठोका था।
कॉम्प्लान बनाने वाली कंपनी हींज के मिल्क पाउडर के अधोमानक मिलने पर कंपनी पर पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया था। जुर्माना लगाने के बाद कंपनी के प्रबंधन ने प्रशासन से कोई संपर्क नहीं किया।
विशाल सिनेमा के सामने राजेश कुमार शर्मा की एजेंसी पर फूड अफसरों ने वर्ष 2012-13 में छापा मारकर एक्सपायर डेट की सीलबंद कोल्ड ड्रिंक पकड़ी थी।
पूछताछ में एजेंसी संचालक ने बताया कि कंपनी को सूचित कर दिया गया है, मगर एक्सपायर डेट का स्टॉक वापस नहीं उठाया गया है।
टीम ने यहां से कोल्डड्रिंक के पांच सैंपल लिए थे। जांच में सभी सैंपल अधोमानक (सब स्टैंडर्ड) पाए गए। मामला एडीएम प्रशासन की कोर्ट में पहुंचा।
साक्ष्य और फूड अफसरों की रिपोर्ट के आधार पर एडीएम प्रशासन विशाल सिंह ने मेमर्स हिंदुस्तान कोका कोला प्राइवेट लिमिटेड, डासना तहसील और जनपद हापुड़ पर प्रति सैंपल तीन-तीन लाख यानी पांच नमूनों पर 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया था।
विक्रेता राजेश कुमार शर्मा पर भी 20-20 हजार के हिसाब से एक लाख जुर्माना लगाया गया था। तय समय सीमा के भीतर कंपनी ने जुर्माना की धनराशि जमा नहीं की।
इस पर एडीएम प्रशासन ने कंपनी को आरसी जारी की है। वहीं, डिबाई के भीमपुर दोराहे से कॉम्प्लान के मिल्क पाउडर का सैंपल लिया गया था जो जांच में सब स्टैंडर्ड पाया गया।
एडीएम ने हींज पर भी पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कंपनी ने जुर्माने की रकम जमा नहीं की। एडीएम प्रशासन ने डीएम के माध्यम से मुंबई के डीएम को वसूली पत्र भेजा है। कंपनी का हेडक्वार्टर मुंबई में है, इसलिए वसूली भी वहीं का प्रशासन करेगा।
मेरठ से सप्लाई हो रहा था नकली प्रोटीन सप्लीमेंट
फूड सप्लीमेंट के बाद अब नकली प्रोटीन सप्लीमेंट का मामला सामने आया है। मेरठ में नकली प्रोटीन सप्लीमेंट बनाया जा रहा था।
इसकी सप्लाई गाजियाबाद सहित एनसीआर में हो रही थी। मेरठ में फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद अफसरों ने सप्लीमेंट की तलाश में छापामारी शुरू कर दी है।
पिछले दिनों अफसरों ने नकली फूड सप्लीमेंट बनाने की तीन बड़ी फैक्ट्रियां पकड़ी थीं। हिंडन विहार, मोरटा और लोनी में नकली सप्लीमेंट बनाने की फैक्ट्रियां चल रहीं थीं।
इसके बाद लोगों ने फूड सप्लीमेंट लेना कम कर दिया था। इसकी जगह प्रोटीन सप्लीमेंट का प्रयोग किया जा रहा था। चिकित्सक भी मरीजों को प्रोटीन सप्लीमेंट देते हैं।
पिछले दिनों गाजियाबाद में सप्लीमेंट में मिलावट की आशंका पर तलाश शुरू की थी। इसके तार लोनी और मेरठ से जुड़े मिले।
डीओ विनीत कुमार ने बताया कि गाजियाबाद और नोएडा में प्रोटीन सप्लीमेंट की जांच करा रहे हैं। नकली की तलाश में छापामारी की जा रही हैं।
लोगों को पक्के बिल पर ही सप्लीमेंट लेने की सलाह दी गई है। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी बिना पक्के बिल के सप्लीमेंट रखने पर रोक लगा दी गई है।..