दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हवा अब भी बेहद खराब बनी हुई है। दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार को वायु गुणवत्ता गंभीर स्थिति में पहुंच गई, यहां इसका एयर क्वालिटी इंडेक्स 453 पर पहुंच गया है। वहीं सोमवार को यह 254 के पार दर्ज किया गया था, जो खतरनाक श्रेणी में आता है। वायु प्रदूषण के प्रकोप से बचने के लिए लोग सड़कों से लेकर कार्यालयों तक में मॉस्क लगाए नजर आए। आसपास के प्रदेशों में पराली जलने का असर दिल्ली-एनसीआर में सर्वाधिक पड़ता है। औद्योगिक नगरी व बाहरी शहरों से आने वाले वाहनों की संख्या भी ज्यादा है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक रिकार्ड किया जाता है। इसका असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर दिख रहा है।
क्या है उपाय
गौतमबुद्धनगर में करीब 33.3 प्रतिशत हरियाली होनी चाहिए। लेकिन, वर्तमान में सिर्फ 2.3 प्रतिशत के आसपास ही हरियाली है। ऐसे में हरियाली को बढ़ाने के लिए पौधरोपण करना होगा। ताकि भविष्य सुरक्षित किया जा सके। इसी कड़ी में सेक्टर-115 में 5 हेक्टेयर जमीन पर 27 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यह पौधे प्रवासी पक्षियों के लिए आश्रय स्थल बन रहे हैं।
पर्यावरणविद् पीपल बाबा ने बताया कि यहां 33.3 प्रतिशत हरियाली के लिए करोड़ों की संख्या में पौधे लगाने होंगे। लोगों को जागरूक करना होगा। कंक्रीट की इमारतों के निर्माण पर रोक लगानी होगी। ताकि प्रकृति को बचाया जा सके।
पिछले एक सप्ताह के दौरान दिल्ली-एनसीआर के शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक(सीपीसीबी)
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शहर
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11 Nov
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10 Nov
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09 Nov
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08 Nov
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07 Nov
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06 Nov
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गाजियाबाद
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330
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368
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307
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355
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325
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294
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नोएडा
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211
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344
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302
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366
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328
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237
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ग्रेटर नोएडा
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239
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338
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278
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367
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318
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247
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दिल्ली
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228
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321
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283
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330
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309
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214
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फरीदाबाद
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166
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290
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270
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337
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312
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205
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गुरुग्राम
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191
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282
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290
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306
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284
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168
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उत्तर प्रदेश के शहरों की सांसों का ऐसा है हाल
उत्तर प्रदेश की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से आठ उत्तर प्रदेश के हैं। गाजियाबाद, हापुड़, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, बागपत और कानपुर में एक्यूआई काफी हानीकारक है। इन शहरों में दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषण है।
लखनऊ
नवाबों के शहर और प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को चली हवा ने भले ही धुंध को कम किया हो, लेकिन अब भी हवा की सेहत सुधरी नहीं है। मंगलवार को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज हुआ है जो सोमवार के स्तर 126 से ज्यादा है। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. राम करन का कहना है कि लखनऊ में भी अगले 24 घंटे में वायु प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा। लगातार प्रदूषण करने वाली इकाइयों में काम बंद कराने, जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई की जा रही हैं।
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि जब तक वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से नीचे नहीं आ जाता, लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। मदर इन लॉ टंग, स्पाइडर लिली, पीस लिली, मनी प्लांट, अरेका पॉम, सिंगर पॉम जैसे पौधे लगाने से कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, बैंजीन आदि गैसों के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है।
आगरा
मंगलवार सुबह धुंध का असर कुछ कम दिखाई दिया। वहीं मथुरा, फिरोजाबाद, कासगंज में भी धुंध का असर दिवाली के दिनों की अपेक्षा कम दिखाई दिया है। आगरा में मंगलवार को वायु गुणवत्ता 169 दर्ज की गई है, जो सोमवार के वायु गुणवत्ता सूचकांक 171 से कम है। पिछले कुछ दिनों के मुकाबले सोमवार को धुंध कम रही। हालांकि आगरा, फिरोजाबाद, एटा-कासगंज और मथुरा में पीएमटू काफी बढ़ा रहा है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकरक है।
कानपुर
उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक कानपुर में तड़के धुंध के बाद मंगलवार को चटख धूप निकलने से प्रदूषण में काफी कमी आई। हालांकि मंगलवार को प्रदूषण फिर बढ़ गया है और यहां वायु गुणवत्ता 244 दर्ज की गई है, जो सोमवार को 175 रिकॉर्ड की गई थी। भारतीय मौसम विज्ञान की ओर से जारी पूर्वानुमान की मानें तो, कानपुर मण्डल में 14 नवंबर तक सुबह में धुंध, 15 और 16 नवंबर को पूरे दिन धुंध रहेगी।
मेरठ
मेरठ की बात करें तो बीते दिनों शहर व देहात में बूंदाबांदी होने और तेज हवा चलने से एक्यूआई में काफी सुधार आया था। यह घट कर 193 तक पहुंच गया था, लेकिन शनिवार को एक्यूआई 250 के पार था। रविवार को इसने 300 का आंकड़ा छू लिया। मंगलवार को यहां की वायु गुणवत्ता 158 दर्ज की गई जो सोमवार को 184 रिकॉर्ड किया गया था। यह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
प्रयागराज
शहर में दमघोंटू हवा का प्रकोप गहराता जा रहा है। सोमवार को दिनभर हवा खराब से खतरनाक स्तर पर पहुंचने को बढ़ती रही। इनमें 317 एक्यूआई के साथ बढ़े वायु प्रदूषण से सांस लेना मुश्किल रहा। हालांकि मंगलवार को हवा में कुछ सुधार हुआ है और वायु गुणवत्ता 151 दर्ज की गई है।
वाराणसी
दीपावली के बाद से वाराणसी में बढ़ा प्रदूषण पिछले एक सप्ताह से कंट्रोल में है। बनारस में फिलहाल अच्छी हवा बह रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पॉल्यूशन रोकने के लिए कवायद में जुटा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सोमवार को एक्यूआई का स्तर 166 रिकार्ड किया गया, जो बीमार बनाने के लिए काफी है। मंगलवार को यह 182 दर्ज किया गया जो बहुत खराब की श्रेणी में आता है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है, साथ ही सड़क किनारे बिल्डिंग मैटेरियल रखकर धूल उड़ाने के मामले में बोर्ड कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।
झांसी
शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बात की तस्दीक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पिछले पांच साल के आंकड़ों से की जा सकती है। बावजूद, इसके नियंत्रण के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। मंगलवार को हवा थोड़ी खराब हुई है और वायु गुणवत्ता 117 दर्ज की गई है जो सोमवार को 113 दर्ज की गई थी।
मुरादाबाद
शहर के जहरीली हवा नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने तमाम कवायदें ढाक के तीन पात ही साबित हो रही हैं। यहां मंगलवार को वायु गुणवत्ता 176 दर्ज की गई जो सोमवार के सूचकांक 172 से अधिक।
हरियाणा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, रविवार को करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत प्रदेश के कई शहरों में स्मॉग छाए रहने से हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही। वहीं, रोहतक, अंबाला, बहादुरगढ़, हिसार, कैथल, यमुनानगर और सोनीपत की हवा खराब की श्रेणी में रही। दूसरी तरफ, भिवानी, फतेहाबाद और सिरसा की हवा संतोषजनक स्तर पर रही। आने वाले दिनों में जब कोहरा गहना होगा तो धूल कण और धुंध लोगों को परेशान कर सकती है।
12 नवंबर से फिर बढ़ेगा प्रदूषण
प्रदूषण से कुछ दिन राहत मिलने के बाद चंडीगढ़ का एक्यूआई फिर से बढ़ने लगेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 12 नवंबर के आसपास हवाओं की दिशाओं में कुछ परिवर्तन आएगा। उसके बाद एक्यूआई फिर बढ़ने के आसार थे और ऐसा ही हुआ। मंगलवार को पूरे हरियाणा का समग्र एक्यूआई 298 दर्ज किया गया, वहीं कई इलाकों 500 और 600 के ऊपर एक्यूआई दर्ज किया गया है। हालांकि, रविवार को सेक्टर 25 का एक्यूआई 141 दर्ज किया गया, जो मध्यम की श्रेणी में आता है। पिछले दिनों बारिश के वक्त एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था।
पराली के कारण एआरआई का खतरा अधिक
अमेरिका के इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट एवं सहयोगी संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण उत्तर भारत के विभिन्न जिलों में रहने वालों में एक्यूट रेसपिरेटरी इन्फेक्शन (एआरआई) का खतरा बहुत अधिक होता है। इस अध्ययन में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इस संक्रमण का खतरा सर्वाधिक होता है।
पंजाब
बारिश से मामूली राहत के बाद एक बार फिर से राज्य की आबोहवा में जहर की मात्रा बढ़ने लगी है। सोमवार को मोहाली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 157 दर्ज किया गया। पहाड़ों में हुई बर्फबारी और बारिश का असर मैदानी इलाकों में दिखने लगा है। पंजाब के कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को चंडीगढ़ का एक्यूआई 223 दर्ज किया गया, जो लोगों को बीमार बनाने के लिए काफी है। हालांकि मंगलवार को एक्यूआई 176 दर्ज किया गया जो सोमवार से कुछ सुधरा हुआ है।
हिमाचल प्रदेश
दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश की राजधानी शिमला की आबोहवा दिन प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है। हिल्स क्वीन शिमला की हवा में प्रदूषण का स्तर सुरक्षित मानकों से कहीं अधिक बढ़ गया है, जो शहर के लोगों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से दमा और खांसी की बीमारी की आशंका अलावा दमा के रोगियों के लिए बहुत ही नुकसानदेय है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दिवाली पर शहर की हवा में मापे गए प्रदूषण के स्तर की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सोमवार को एक्यूआई का स्तर 110 दर्ज किया गया है।
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी संजय सूद ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार आरएसपीएम रेट बढ़ा है।
उत्तराखंड
राज्य में मौसम के बदले मिजाज से प्रदूषण और अधिक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राजधानी देहरादून व आसपास के इलाकों में आसमान में सोमवार को सुबह के समय धुएं का गुबार छाया रहा। कुछ जागरूक शहरियों ने प्रदूषण के खतरों से खुद को बचाने के लिए मास्क का उपयोग किया। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 145 था, जो मंगलवार को घटकर 126 पर आ गया।
जम्मू-कश्मीर
राज्य में वायु प्रदूषण का स्तर काफी हैरान करने वाला है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक जम्मू का एक्यूआई सोमवार को 150 रहा और मंगलवार को यह बढ़कर 155 हो गया। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों के गुणवत्ता सूचकांक पर नजर डालें तो कठुआ-151, अनंतनाग-103, श्रीनगर-103, सोपोर-97,बारामुला-103 है।
वहीं जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन सरेश चुग ने बताया कि वायु गुणवत्ता मापने के लिए जम्मू विश्वविद्यालय व कश्मीर में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगाने की योजना है। चुग ने बताया कि निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। महीने भर के अंदर दोनों जगहों पर काम को पूरा कर लिया जाएगा।