जेएनयू अध्यक्ष आइशी घोष और अन्य छात्र
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने शनिवार को दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिंसा होने से पहले ही भीड़ जुटने पर पुलिस को सूचना दे दी गई थी। दिल्ली पुलिस ने सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की। बार-बार प्रदर्शनकारियों को हिंसा में शामिल होने का आरोप लगाकर झूठ फैलाया जा रहा है। छात्रसंघ ने इस पूरी हिंसा में एबीवीपी के साथ आरएसएस से जुड़े लोगों को भी शामिल होने का आरोप लगाया है।
जेएनयू कैंपस में देर शाम मीडिया से बात करते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष, उपाध्यक्ष साकेत मून व महासचिव सतीश चंद्र यादव ने कहा कि हिंसा की सूचना देने के बाद पुलिस ने मैसेज पढ़ा पर अनदेखी की। उन्होंने दोपहर तीन बजे इसकी सूचना दी और तीन बजकर सात मिनट पर पुलिस इसे पढ़ चुकी थी। इसके बावजूद पुलिस की ओर से अनदेखी की गई।
आइशी ने कहा कि कैंपस में छात्र और छात्राओं पर हुए हमले में एबीवीपी ही नहीं, आरएसएस के लोग भी शामिल थे। छात्रसंघ ने कहा कि एबीवीपी सदस्यों ने चार जनवरी को भी छात्राओं के साथ मारपीट की थी और जब छात्रसंघ महासचिव सतीश चंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया तो उनके साथ भी मारपीट की गई। छात्रसंघ ने कहा, हमलावरों ने साबरमती छात्रावास के चुनिंदा कमरों को ही निशाना बनाया और यहां तक की छात्राओं को बालकनी से बाहर भी फेंक दिया, लेकिन उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं के कमरों को छुआ तक नहीं।
बयान दर्ज कराने से बच रहे घायल छात्र
सूत्रों की माने तो अभी नकाबपोश हमलावरों की पहचान करना तो दूर पुलिस घायलों के बयान तक नहीं ले सकी है। वे पुलिस के बुलाने पर भी बयान देने के लिए नहीं आ रहे। वहीं हिंसा में घायल हुए कुछ छात्रों का कहना है कि वह जेएनयू में पढ़ाई के लिए आएं थे ना कि किसी पुलिस पचड़े में पड़ने के लिए। इसलिए ही छात्र बयान देने से अब पीछे हट रहे हैं।
लेफ्ट संगठन से जुड़े छात्रों ने पुलिस पर लगाया पक्षपात का आरोप
लेफ्ट संगठन से जुड़े छात्रों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि इस हमले के पीछे (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) एबीवीपी के छात्रों का हाथ है। ऐसे में पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया पर कई वायरल वीडियो में एबीवीपी से जुड़े लोग साफ नजर भी आ रहे हैं, लेकिन पुलिस उसे दरकिनार कर रही है।