अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तीन सदस्यीय टीम के साथ बृहस्पतिवार को बिसाहड़ा गांव पहुंचे। गांव से जा चुके इकलाख के परिजन और भाइयों को प्रशासन ने आनन-फानन में गांव बुलवा लिया।
जिलाधिकारी और एसएसपी की मौजूदगी में आयोग अध्यक्ष ने सभी परिजनों से गांव न छोड़ने और हर संभव मदद का भरोसा दिया, लेकिन परिवार अब गांव में रहने को तैयार नहीं है। तीनों भाई बृहस्पतिवार शाम गांव से फिर वापस चले गए।
बृहस्पतिवार को अल्पसंख्यक आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नसीम अहमद, टीएन शाहनू और प्रोफेसर अब्दुल खान पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उनके साथ जिलाधिकारी एनपी सिंह, एसएसपी किरण एस, एसडीएम और पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
गांव न छोड़ने की बात दोहराई गई, लेकिन परिवार तैयार नहीं हुआ।
पुलिस और प्रशासन की ओर से परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया। इस दौरान हिंदू समाज के लोगों के साथ बैठक भी हुई। सभी लोगों ने घटना को गांव के लिए बेहद शर्मनाक बताया और परिवार की हर तरह से मदद की बात कही।
मुस्लिम बेटियों की शादी और अब इकलाख के परिवार को भी पूरी सुरक्षा देने का हवाला देते हुए गांव न छोड़ने की बात दोहराई गई, लेकिन परिवार तैयार नहीं हुआ।
दरअसल, इकलाख के दो भाई जमील और जान मोहम्मद पहले से ही लोनी और दादरी में रह रहे हैं। बुधवार को इकलाख के परिवार के सदस्य और उनके भाई अफजाल का परिवार भी बिसाहड़ा से चला गया था।
‘खुद दादरी में रहकर हमें क्यों रोक रहे’
बिसाहड़ा के ही एक प्रतिष्ठित व्यक्ति इन दिनों दादरी में रह रहे हैं। इस दौरे की सूचना पर वे भी गांव पहुंचे थे। आस-पड़ोस के लोगों की मौजूदगी में उन्होंने इकलाख के भाइयों से गांव न छोड़ने की बात कही।
इस पर भाइयों ने कहा कि जब आप खुद दादरी में रह रहे हैं तो उन्हें गांव से बाहर रहने के लिए क्यों रोक रहे हैं। आयोग की टीम व प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर फिर गांव चले गए रेलवे से रिटायर हूं।
अफजाल ने कहा कि गांव में लुहार की दुकान खोलना चाहता था, घटना के बाद मेरे परिवार का मन गांव में रहने की गवाही नहीं दे रहा। प्रशासन और गांव के लोग हर तरह का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन अब हम गांव में नहीं रहेंगे।