केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 1 मई को होने वाली ऑल इंडिया प्री मेडिकल/प्री डेंटल टेस्ट (एआईपीएमटी) में आवेदन करना एक बार फिर महंगा हो गया है।
बीते साल आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी करने बाद एक बार फिर इसमें बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही इस बार विलंब शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। मालूम हो कि देश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 15 प्रतिशत सीटें एआईपीएमटी के जरिए ही भरी जातीं हैं।
बीते सप्ताह सीबीएसई ने एआईपीएमटी की परीक्षा तिथि घोषित करने के साथ अन्य जानकारी भी जारी कर दी है। एआईपीएमटी की प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 दिसंबर से शुरू हो रही है जो कि 12 जनवरी 2016 तक चलेगी।
आवेदकों को इस साल पिछली साल की तुलना में ज्यादा फीस चुकानी होगी। इसके लिए सामान्य व ओबीसी वर्ग के आवेदकों को 1400 और एससी-एसटी व शारीरिक रूप से अक्षम वर्ग के लोगों को 750 रुपये चुकाने होंगे जबकि पिछले वर्ष यह फीस 1200 और 650 रुपये हुआ करती थी।
इस तरह सामान्य व ओबीसी के आवेदन शुल्क में दो सौ रुपये तो वहीं एससी-एसटी व शारीरिक रूप से अक्षम वर्ग के आवेदन शुल्क में सौ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। सीबीएसई ने लेट फीस के साथ आवेदन करने के लिए भी अवसर प्रदान किया है। लेट फीस के लिए सभी वर्ग के लोगों को 1400 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। विलंब शुल्क के साथ सामान्य व ओबीसी श्रेणी के आवेदकों को 1400 रुपये अतिरिक्त भुगतान के साथ 2150 रुपये का भुगतान करना होगा।
एआईपीएमटी के लिए आवेदन का शेड्यूल
एआईपीएमटी के लिए ऑनलाइन आवेदन 15 दिसंबर से शुरू होगा। जो आवेदक फीस का भुगतान ई चालान के माध्यम से करेंगे वह 8 जनवरी तक फॉर्म भर सकेंगे। ई-चालान के माध्यम से फॉर्म भरने वाले आवेदक लेट फीस के साथ 13 जनवरी से 6 फरवरी तक आवेदन कर सकेंगे। जबकि डेबिट व क्रेडिट कार्ड के जरिए लेट फीस के साथ फॉर्म 13 जनवरी से 10 फरवरी तक भरा जा सकेगा। एआईपीएमटी की वेबसाइट से 1 अप्रैल से एडमिट कार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा जबकि रिजल्ट 5 जून 2016 को जारी होगा।
परीक्षा में पेन लेकर जाने की अनुमति नहीं
परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए छात्रों को इस बार भी केंद्र पर पेन ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। छात्रों को ओएमआर सीट भरने के लिए केंद्र पर ही बाल पेन उपलब्ध कराए जाएंगे। परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर पर केवल एडमिट कार्ड, कार्ड बोर्ड व पोस्ट कार्ड फोटोग्राफ लेने जाने की ही मंजूरी होगी। मालूम हो कि पिछले साल परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के कारण परीक्षा रद्द कर इसे दोबारा कराया गया था।