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AIIMS Seminar : विशेषज्ञों की चिंता- अगर प्रदूषण पर बड़े प्रहार नहीं किए तो समस्या विकराल होगी

Sun, 19 Nov 2023 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

सिंघु-गंगा मैदान क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर हर मौसम में अलग-अलग रहता है। जो इन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के शरीर क्रिया विज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। 
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demo pic... - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रदूषण की मार से परेशान उत्तर भारत को लेकर जल्द ही बड़ी योजनाएं बनेगी। सिंघु-गंगा मैदान क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर हर मौसम में अलग-अलग रहता है। जो इन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के शरीर क्रिया विज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि शोध बताते हैं कि बढ़ता प्रदूषण का स्तर लोगों को दिल, दिमाग, सांस का मरीज बना रहा है। इसके अलावा बच्चों में अस्थमा व उनमें बुद्धिमता और सोचने समझने की क्षमता को कम कर रहा है। यदि जल्द प्रदूषण पर बड़े प्रहार नहीं किए गए तो समस्या विकराल हो जाएगी। इस समस्या को देखते हुए एम्स में भारत में वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य -विज्ञान, नीति, कार्यक्रम और सामुदायिक जुड़ाव पर आगे बढ़ने के लिए कार्रवाई विषय पर सेमिनार का आयोजन हुआ। 

इस राष्ट्रीय परामर्श में पर्यावरण और स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े विशेषज्ञों ने तीन मामलों पर फैसला किया। इसमें प्रदूषण से होने वाले शोध का डाटा तैयार करना, उन डेटा के आधार पर नीति-निर्धारकों से राष्ट्रीय नीति तैयार करवाना शामिल है। साथ ही प्रदूषण की रोकथाम के अभियान में लोगों को जोड़ना शामिल है। 
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इसमें प्रदूषण की रोकथाम के लिए टास्क फोर्स भी बनाया जा सकता है, जो पंजाब से लेकर पश्चिम-बंगाल तक प्रदूषण की पहचान कर उसकी रोकथाम के लिए काम करेगा। इस बारे में एम्स से डॉ. हर्षसल साल्वे ने बताया कि बैठक में प्रदूषण के स्त्रोत की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए प्लान बनाने का फैसला किया गया है। साथ ही शोध को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य बजट को बढ़ाने की दिशा में भी कोशिश की जाएगी। 

बैठक में डॉ. जगदीश कौर (डब्ल्यूएचओ), प्रोफेसर एसएन त्रिपाठी (आईआईटी, कानपुर),  पुनिता कुमार (राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र), अजरा खान (स्वच्छ वायु उत्प्रेरक) ने शोध के माध्यम से बताया कि इसके कारण न केवल स्वास्थ्य बजट पर बोझ बढ़ रहा है। बल्कि हमारी उत्पादित जनसंख्या भी कमजोर हो रही है। 

बच्चों के लिए परेशानी 
दुनियाभर में हुए शोध को आधार बनाकर विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले कुछ सालों से बच्चों में याद रखने की क्षमता घटी है। साथ ही गणित के सवाल करने में भी बच्चे पहले ही तरह प्रदर्शन नहीं दे पा रहे। यह आने वाले समय में देश के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर देंगे। अभी तीन-चार साल के बच्चे अगले 10-15 साल युवा होंगे। इन बच्चों में प्रदूषण के कारण कई गंभीर बीमारी हो सकती हैं। 

24 लाख लोगों की मौत 
लैंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में एक साल में करीब 24 लाख लोगों की मौत के लिए प्रदूषण जिम्मेदार है। इस हिसाब से रोजाना 6.5 हजार लोगों की मौत प्रदूषण से होने वाली बीमारियों की वजह से होती हैं। दिल्ली में पीएम 2.5 जैसे आकार के छोटे प्रदूषकों का स्तर हवा में सालाना 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक बढ़ने से 0.3 फीसदी मौत बढ़ जाती हैं।
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