जालसाज ठगी के पैसे विदेश भेज रहे हैं। भारत में ठगी गई रकम को दुबई व इंडोनेशिया में निकाला जाता है। इसके अलावा ठगी की रकम को क्रिप्टो करंसी के माध्यम से चीन, दुबई व इंडोनेशिया आदि देशों में भेजा गया।
यह खुलासा दक्षिण जिले की साइबर थाना पुलिस ने जालसाजी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर एक आरोपी जितेंद्र उर्फ मेघराम की गिरफ्तारी के बाद किया है। जांच के बाद पुलिस अधिकारी मान रहे हैं कि इस गिरोह के जालसाज पूरे देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुके हैं। गिरोह के बदमाश प्री पेड टास्क के नाम पर ठगी कर रहे थे।
दक्षिण जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार वर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर हंसराम, हवलदार रामवीर, तरुण, संदीप और महिला सिपाही पारूल की टीम ने जयपुर, राजस्थान से जिस आरोपी जितेंद्र को गिरफ्तार किया है, उसके जयपुर स्थित पीएनबी बैंक में स्थित खाते में दो दिन में ही सिर्फ 1.20 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। ये कमीशन पर जालसाजों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था। इसे कुल रकम के लेन-देन पर एक से डेढ़ प्रतिशत कमीशन मिलता था।
प्री पेड टास्क के नाम पर करते थे ठगी
गिरोह के जालसाज लालच देकर पीडि़त को जाल में फंसाते थे। ये मैसेज व अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को लालच देते थे कि घर बैठे हर दिन दो से पांच हजार रुपये कमाएं। ये लोगों से लाइव व सब्सक्राइब कराते थे। अगर कोई पीडि़त एक लाइक करता था तो ये उसे 50 रुपये देते थे। ये 3 से 4 लाइक का पैसे देते थे। इसके बाद ये पीडि़त से कहते थे कि उन्हें प्री पेड टास्क करना पड़ेगा।
यानी उन्हें पहले पैसे लगाने होंगे और फिर उनको मोटा मुनाफा मिलेगा। अगर कई पीडि़त 1000 रुपये लगा देता था तो ये पीडि़त को 10 मिनट में 1650 रुपये वापस दे देते थे। फिर पीडि़त 13 हजार रुपये जमा कराता तो ये पीडि़त को 10 मिनट में 13 हजार रुपये दे देते थे। इसके बाद ये पीडि़त को कहते थे कि उन्हें ग्रुप में टास्क करना पड़ेगा। ये पीडि़त से चार किस्तों यानि 12 हजार, 50 हजार, दो लाख और तीन लाख रुपये अपने पास निवेश कराते थे।
ये पीड़ित का फर्जी साइट पर फर्जी एकाउंट बना देते थे। इन एकाउंट पर पीड़ित का निवेश व ब्याज दिखता रहता था। इसके बाद ये पीड़ित को एक ग्रुप में जोड़ लेते थे। ग्रुप में फर्जी सदस्य होते थे। ये पीड़ित को बहकाने के लिए ग्रुप में लिखते रहते थे कि उसने इतना पैसा निवेश किया और उन्हें काफी ब्याज मिला था।
ये फिर पीड़ित से कहते थे कि एक गलती हो गई और उसे ऑनलाइन रिपेयर करना होगा। इस तरह ये फिर चार टास्क देकर पीड़ित से मोटी रकम निवेश करा लेते थे। इसके बाद कहते थे कि उन्हें मोटी रकम मिलेगी और भारत सरकार इस रकम पर टैक्स लगा रही है। फिर से टैक्स के नाम पर पीड़ित से मोटी रकम हड़पते थे।
14 खातों में गई ठगी की रकम
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने हाल ही में एक संगम विहार निवासी शिक्षक से 31.50 लाख रुपये ठगे थे। ठगी की ये रकम 14 बैंक खातों में गई। पुलिस ने इन बैंकों को नोटिस देकर खातों की डिटेल मांग रही है। हालांकि 4-5 बैंक खातों की डिटेल पुलिस का मिल गई है। इन 4 से 5 बैंक खातों में ही कुछ दिन में ही 10-12 करोड़ का लेन-देन हुआ है।
इस पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक बैंक खाते से कुछ लाख रुपये एटीएम के जरिये दुबई में निकाले गए हैं। पुलिस को पता लगा कि इनमें से एक नंबर इंडोनेशिया का है। पुलिस बाकी आरोपियों को पकडऩे के लिए देश में कई जगह दबिश दे रही हैं।
12 दिन में शिक्षक से ठगे 31.50 लाख
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों ने पीड़ित शिक्षक से 5 से 16 अक्तूबर तक यानी मात्र 12 दिन में 31.50 लाख रुपये ठग लिए थे। शिक्षक से ये रकम निवेश कराकर आरोपी गायब हो गए। साइबर थाने में 25 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई। साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार वर्मा की देखरेख में टीम ने जांच करते हुए कुछ ही दिनों में जयपुर से एक आरोपी जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। जितेंद्र के बैंक खाते में जालसाजी के पांच लाख रुपये गए थे।
बैंक खाते खरीदते थे आरोपी
आरोपी जितेंद्र ने बताया कि उसने एक एप्लीकेशन पर लिंक किया था। इस लिंक को उसने डाउनलोड किया। यहां पर उसे बैंक खाता मिला। इस बैंक खाते पीएनबी, आईसीआईसीआई आदि बैंकों होते है। ऑनलाइन खोले गए ये बैंक खाते दो से तीन दिन सक्रिय होते हैं। इनमें मोटी रकम आती है। रकम को कहीं और निकालकर इन बैंक खातों को बंद कर दिया जाता था।
आईपी एड्रेस चीन का आया
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार चीन, दुबई व इंडोनेशिया में बैठकर भारत में जालसाजी कर रहे हैं। पुलिस ने जितने भी मोबाइल व साइट का आईपी एड्रेस पता किया है तो चीन में चलने वाली साइट अलीबाबा क्रलाउट्स जैसी साइटों के हैं। ये सभी साइट से चीनी डोमिन में रजिस्टर होती हैं। ईडी व अन्य एजेंसियां छोटी रकम की जांच नहीं करती है और पुलिस को विदेश में जाकर जांच करने का अधिकार नहीं होता है।