इसके बाद सब जगह से हार मानकर आरिफ दिल्ली के एम्स अस्पताल पहुंचा। एम्स में डॉक्टर बिप्लब मिश्रा ने आरिफ की सर्जरी करने का चैलेंज लिया जो चेस्ट के अंदर के ऑर्गन्स की सर्जरी करने के स्पेशलिस्ट हैं।
डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि वैसे तो यह ऑपरेशन काफी मुश्किल था और मैंने मरीज को बता दिया था कि इस ऑपरेशन में उसकी जान भी जा सकती है। लेकिन जब मरीज ने कहा कि वो ये चांस लेगा तो मेरे अंदर भी आत्मविश्वास आ गया।
यह केस कितना चैलेंजिंग था इसका पता इसी बात से चलता है कि 97 छर्रों में से अधिकतर एक झुंड में हार्ट वॉल से सिर्फ 1 सेंटीमीटर ऊपर थे और बाईं धमनी और बाएं फेफड़े से बस कुछ ही दूरी पर धंसे हुए थे।
सबसे पहले हमने कई सिटी स्कैन किए। यहां तक कि ऑपरेशन के दौरान भी फ्लोरोस्कोप का इस्तेमाल किया। फ्लोरोस्कोप एक ऐसी तकनीक है जिसमें सर्जरी के दौरान रियल टाइम इमेज एक्सरे के माध्यम से दिखती रहती है।
पहले डॉक्टरों ने ब्रेस्ट की हड्डी को काटा और इंफेक्टेड हिस्से को बाहर निकाला। उसके बाद वो और गहराई में गए और छर्रे निकाले। यहां उन्हें एक चौंकाने वाली बात पता चली। आरिफ के सीने में ना सिर्फ छर्रे अटके थे बल्कि रुई भी अटकी थी।
दरअसल आरिफ को जब गोली लगी तो वह रजाई ओढ़कर सो रहा था। जब गोली मारी गई तो छर्रों के साथ ही रजाई की कुछ रुई भी छर्रों के साथ ही सीने के अंदर चली गई।
चार सालों से शरीर के अंदर छर्रे व रुई घुसे होने से कई घाव हो गए थे, जिन्हें डॉक्टरों ने बहुत संभालकर बाहर किया। सर्जरी पूरी होने के बाद प्लास्टिक सर्जन ने कैविटी से खाली हुए एरिया को किसी दूसरे एरिया से मसल निकालकर भर दिया। ऑपरेशन के चार दिन बाद आरिफ को डिस्चार्ज कर दिया गया।
आरिफ ने बताया कि उसे उसकी शादी से 17 दिन पहले गोली मारी गई थी। इसके पीछे का कारण संपत्ति विवाद था।