एचपीबी पैथोलॉजी पर आयोजित कार्यशाला में होल स्लाइड इमेजिंग से लेकर एआई आधारित निदान पर विशेषज्ञों ने साझा की नई तकनीकें
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लिवर और पित्त संबंधी रोगों की जांच और उपचार को अधिक सटीक बनाने में डिजिटल पैथोलॉजी और एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में एचपीबी पैथोलॉजी, होल स्लाइड इमेजिंग, एनालिसिस और एआई आधारित उपयोगिता पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।
इसमें प्रतिभागियों को नई तकनीक और उनके क्लीनिकल इस्तेमाल से रूबरू कराया गया। कार्यशाला में डिजिटल स्कैनर वर्कफ्लो, एआई की मूल अवधारणा, हेपेटाइटिक और कोलेस्टेटिक पैथोलॉजी, बाइलियरी और पैंक्रियाटिक नियोप्लाज्म, एचपीबी साइटोलॉजी, वैस्कुलर एवं पीडियाट्रिक लिवर पैथोलॉजी, लिवर ट्यूमर और ट्रांसप्लांट पैथोलॉजी पर सत्र आयोजित किए गए। साथ ही प्रतिभागियों को डिजिटल पैथोलॉजी में एआई के व्यावहारिक उपयोग का भी प्रशिक्षण मिला। इसमें इमेज के जरिए होल-स्लाइड इमेज की पड़ताल और एआई टूल्स के साथ काम करने का प्रशिक्षण शामिल रहा।
विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल पैथोलॉजी और एआई के बढ़ते इस्तेमाल से एचपीबी रोगों के निदान की सटीकता बढ़ाने, शोध को गति देने और अत्याधुनिक तकनीकों को क्लीनिकल प्रैक्टिस में शामिल करने में मदद मिलेगी। इस दौरान नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल सिंगापुरी की डॉ. ग्वेनेथ सून भी मौजूद रहे।