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ओलंपिक के बाद अब वर्ल्ड पैरालंपिक चैंपियनशिप पर हैं दीपा मलिक का फोकस

Mon, 19 Sep 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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deepa malik
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रियो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला एथलीट दीपा मलिक और भी पदक जीतना चाहती है। उनकी ख्वाहिश अगले ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण लाना है। 
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45 वर्षीय दीपा ने 12 सितंबर को वूमेन शॉटपुट इवेंट एफ-53 में 4.63 मीटर सर्वश्रेष्ठ देने के साथ एक मिसाल दुनिया के सामने पेश किया। अर्जुन अवार्ड विजेता दीपा कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हैं। 

आर्मी ऑफिसर की पत्नी दीपा वर्ष 1999 में रीढ की हड्डी में ट्यूमर होने के बाद कमर के नीचे से लकवाग्रस्त होने के 6 वर्ष के बाद पैरा खेलों में उतरने का निर्णय लिया था। 
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शुक्रवार देर रात रियो से पदक जीतकर वतन वापसी के बाद रविवार को गुडग़ांव के डीएलएफ फेज-1 में रहने वाली दीपा ने अपने भविष्य की रणनीति और खेल को लेकर खुलकर अमर उजाला संवाददाता शाहनवाज आलम से बात की। पेश हैं प्रमुख अंश:

प्रश्न: ओलंपिक में जीत पर बधाई। अब कैसा लग रहा है?
उत्तर: धन्यवाद। रियो पैरालंपिक के पहले और अब काफी बदलाव आ गया है। पहले खेल से जुड़े लोग जानते थे और अब सभी जान गए। लोग मिलने आ रहे हैं। फोटो खींचवा रहे हैं। सोशल साइट्स पर बड़ाई हो रही है। अब एक सेलिब्रेटी के तरह लोग ट्रीट कर रहे हैं। जिंदगी में बदलाव तो आया है। स्वागत कार्यक्रम में केंद्रीय और प्रदेश के खेल मंत्री खुद मौजूद रहे। 

प्रश्न: रियो में पदक जीतने के बाद अब आगे क्या?
उत्तर: ओलंपिक में जीतना सपना था। वो पूरा कर लिया है। इसके लिए मुझे दस वर्ष लगे। लंदन और बीजिंग में चूक गई थी। जो रियो में पूरा किया। अब आगे और भी खेलती रहूंगी। अभी तो मेरी नींद भी पूरी नहीं हुई है। एक सप्ताह का ब्रेक के बाद फिर से तैयारी में जुट जाऊंगी। अगला फोकस पैरा वल्र्ड चैंपियनशिप है। वहां से देश के लिए स्वर्ण पदक लाने की तैयारी करूंगी।

प्रश्न: दिव्यांग खिलाडिय़ों को लेकर आपकी क्या योजनाएं है?
उत्तर: व्यक्तिगत तौर पर कहूं तो मैं देश में अकेली दीपा नहीं रहना चाहती हूं। हजारों-हजार दीपा पैदा करना चाहती है। इसके लिए एक अकादमी खोलने की योजना है। इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर सरकार को दूंगी। सरकार से जमीन का अनुरोध किया जाएगा। सरकार और कॉर्पोरेट की मदद से खिलाडिय़ों को तराशने का काम होगा। अलग से कोर्स, सिलेबस और रहने का भी वहां इंतजाम होगा। अपनी जीत और ईनाम की रकम भी खर्च करूंगी। 

प्रश्न: देश में दिव्यांग खिलाडिय़ों का भविष्य कैसा देखती है?
उत्तर: आधारभूत सुविधाओं की कमी है, लेकिन हरियाणा में पैरालंपिक खिलाडिय़ों को बेहतर स्थान दिया गया है। अब राष्ट्रीय पैरालंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष स्थानीय सांसद राव इंद्रजीत सिंह बने है। जिस तरह हरियाणा के अध्यक्ष रहते हुए पैरालंपिक खिलाडिय़ों को मौका मिला है, वैसे ही देश के अन्य हिस्सों के लिए बेहतर होगा। देश में कई दीपा मलिक है, जो पदक लाने का माद्दा रखती है।

प्रश्न: दिव्यांगों के लिए क्या संदेश है?
उत्तर: दिव्यांग अंग से नहीं हौंसले से लोग हो जाते हैं। आप हौसला कीजिए, पूरा जमाना आपके कदमों में होगा। इसके लिए थोड़ी मेहनत के साथ हौसला दिखाना होगा। ऐसे लोगों के लिए कई मिसाल है। समाज को भी इन्हें हौसला देना होगा। 
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