खनन के खेल में जांच के बाद अफसरों पर गाज गिर ही गई। अवैध खनन के मामले में बदनाम हुई यूपी सरकार ने एनसीआर में खनन विभाग के पूरे स्टाफ को एक साथ बदल डाला है।
अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे महकमे में चर्चाओं का दौर है। गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के पूरे स्टाफ को फिलहाल लखनऊ अटैच किया गया है।
बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, शामली और बिजनौर आदि जिलों के स्टाफ पर भी गाज गिर सकती है। शासन से नए खनन अधिकारी पीके सिंह को इलाहाबाद से यहां भेजा गया है।
असल में दुर्गाशक्ति नागपाल पर अवैध खनन रोकने की गाज गिरने के बाद अन्य अफसरों ने भी इससे हाथ खींच लिए थे। गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर में खुलेआम खनन चल रहा था।
पट्टा न होने और पर्यावरण विभाग की एनओसी न होने के बावजूद धड़ल्ले से खनन चल रहा था। अमर उजाला लगातार खनन के खेल को सीरीज बनाकर प्रकाशित करता रहा है।
जिला खनन अधिकारी के रूप में गाजियाबाद में तैनात किए गए नवीन कुमार दास को गाजियाबाद के साथ ही गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, शामली और बिजनौर आदि जिलों का प्रभार भी दे दिया था।
ज्यादातर जिलों में अवैध खनन होने के साथ ही ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का भी पालन नहीं हुआ था। इन्हीं आरोपों के बीच शासन ने जिला दस जिलों का काम देख रहे खनन अधिकारी नवीन कुमार दास के साथ ही गाजियाबाद-गौतमबुद्धनगर के समस्त स्टाफ को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है।
रिपोर्ट में मिले थे खनन के सुबूत
खनन विभाग के अफसरों ने शासन को भेजी जांच में एनसीआर में खनन न होने की रिपोर्ट भेजी थी। इसकेे बाद लखनऊ व दिल्ली के अफसरों की संयुक्त टीम ने क्षेत्र का दौरा किया था, जिसमें खनन होने की पुष्टि हुई थी।