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अपनों को रुला दूसरों को दीं खुशियां: 16 महीने के रिशांत ने दुनिया को कहा अलविदा, उसके अंगों ने दो को दी जिंदगी

Thu, 25 Aug 2022 06:03 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

17 अगस्त की सुबह रिशांत गिर गया था और गंभीर रूप से घायल हो गया। पिता उपिंदर तुरंत उसे जमुना पार्क में अपने घर के पास निजी अस्पताल में ले गए। सिर में गंभीर चोट के कारण अस्पताल ने रिशांत को दोपहर बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर में रेफर कर दिया। यहां 24 अगस्त तक वह मौत से जूझता रहा और 24 अगस्त को ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया।
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मासूम रिशांत(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के एम्स में एक 16 महीने के बच्चे की मौत के बाद उसके घरवालों ने जो निर्णय लिया, उससे दो बच्चों को नई जिंदगी मिल गई। जहां मासूम की मौत ने सबको भावुक कर दिया, वहीं उसके परिजनों ने दूसरों के घरों के चिराग सलामत रहें, इसलिए उन्होंने बच्चे के अंगदान करने का फैसला लिया।

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16 महीने का रिशांत घर में सबका चहेता था, सभी के चेहरों पर मुस्कान का कारण था। अचानक खेलते हुए 17 अगस्त को उसके सिर पर गंभीर चोट लग गई और उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर (दिल्ली) में भर्ती करवाया गया। यहां एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा और 24 अगस्त को जिंदगी से हार गया। रिशांत की मौत के बाद माता-पिता ने अंगदान करने का फैसला लिया।

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राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नाटो) द्वारा अंगों का आवंटन किया गया था। रिशांत की दोनों किडनी को एम्स (नई दिल्ली) में उपचार करवा रहे पांच साल के बच्चे में प्रत्यारोपित किया गया है, जबकि लीवर को मैक्स अस्पताल में छह महीने की बच्ची में ट्रांसप्लांट किया गया है। इसके अलावा दिल के वॉल्व और कॉर्निया को एम्स में सुरक्षित रखा गया है।

एम्स के अनुसार, एम्स में ब्रेन डेड घोषित किए गए रिशांत के परिवार ने दो से अधिक लोगों की जान बचाने के लिए अंगदान पर सहमति जताई। 17 अगस्त की सुबह रिशांत गिर गया था और गंभीर रूप से घायल हो गया। पिता उपिंदर तुरंत उसे जमुना पार्क में अपने घर के पास निजी अस्पताल में ले गए। सिर में गंभीर चोट के कारण अस्पताल ने रिशांत को दोपहर बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर में रेफर कर दिया। यहां 24 अगस्त तक वह मौत से जूझता रहा और 24 अगस्त को ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया। शोकग्रस्त परिवार को ओआरबीओ, एम्स के डॉक्टरों और ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटरों द्वारा परामर्श दिया गया और उन्हें अंगदान के बारे में सूचित किया गया।

पांच बहनों का इकलौता भाई था रिशांत
पिता उपिंदर ने कहा कि रिशांत 5 बहनों का सबसे छोटा भाई था। मैं उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन की सुबह काम पर निकलने में व्यस्त था और अपने बच्चे को बांहों में भी नहीं पकड़ सका। अब मुझे लगता है कि अगर उसके अंग दूसरे लोगों की जान बचा सकते हैं, तो मुझे उन्हें दान करना चाहिए।
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परिवार की सहमति जरूरी
एम्स अंग पुनर्प्राप्ति बैंकिंग संगठन (ओआरबीओ) की प्रमुख डॉ. आरती विज ने कहा कि प्रत्येक अंगदान के पीछे व्यापक कार्य और प्रत्यारोपण होता है। मृतक के परिवार की सहमति प्राप्त करने से लेकर अंगों की सुरक्षित पुनर्प्राप्ति, अंगों के आवंटन और परिवहन तक, कई टीमें काम करती हैैं। यह कई टीमों के बीच प्रभावी और कुशल समन्वय के कारण सफल हो पाता है। उपचार करने वाले चिकित्सक, प्रत्यारोपण समन्वयक, प्रत्यारोपण दल, ओटी टीम, फोरेंसिक विभाग, सहायता विभाग, नोटो और पुलिस विभाग ने इसे संभव बनाया।
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