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प्रतिबंध के बाद भी डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन जारी

Tue, 16 Feb 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाने वाला फरीदाबाद सरकारी तंत्र की लापरवाही की मार झेल रहा है। डीजल से चलित ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर एक जनवरी से रोक लगने के बावजूद यहां रजिस्ट्रेशन जारी है। जब कि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की पर्यावरण संबंधी शाखा ईपीसीए (एंवायरंमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी) ने फरीदाबाद के उपायुक्त को मामले की जांच के लिए कहा है।
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इस बारे में अधिकारियों के खिलाफ समस्त हरियाणा ऑटो रिक्शा यूनियन ने ही आवाज उठाई है। यूनियन के अध्यक्ष वासदेव अहेरिया ने अधिकारियों के इस गोरखधंधे के बारे में बताया कि एक जनवरी के बाद भी अधिकारी डीजल ऑटो का रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं।

उन्होंने 15 व 27 जनवरी और 4 फरवरी के ऑटो रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिखाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। यूनियन का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ अपने फायदे को देख्र रहे हैं, उन्हें पर्यावरण की कोई चिंता नहीं है।
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ऑटो यूनियन के अध्यक्ष वासदेव अहेरिया ने बताया कि कोर्ट की ओर से साफ निर्देश हैं कि डीजल वाहनों  की सवारी गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन न किया जाए। लेकिन इसके बावजूद आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) के अधिकारी लगातार डीजल वाहनों में सवारी ऑटो का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।

 विभाग की ओर से जनवरी और फरवरी में भी रजिस्ट्रेशन किए गए हैं। एनसीआर में सिर्फ सीएनजी  के वाहनों का चलाने के आदेश के बाद भी अधिकारी गंभीर दिखाई नहीं दे रहे। डीजल चलित ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर रोक के आदेश एक जानवरी से लागू कर दिए हैं। कोर्ट की पर्यावरण से संबंधित शाखा ईपीसीए की ओर से एनसीआर के सात जिले में डीजल से चलने वाले  यात्री वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद किया जा चुका है।

समस्त हरियाणा ऑटो रिक्शा यूनियन के प्रधान वासदेव अहेरिया ने बताया कि  शहर में करीब 24 हजार ऑटो दौड़ रहे हैं। इसमें 9 हजार डीजल ऑटो हैं जो हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। इसके अलावा करीब 7 हजार ऑटो 20 साल पुराने हैं जो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन ऑटो की न तो फिटनेस पास है और न ही  सुरक्षा के लिहाज से ठीक हैं।

अहेरिया ने बताया कि  आरटीए विभाग की ओर से  न तो ऑटो का फिटनेस  चेक किया जाता है और न ही इन्हें देखा जाता है। उनका कहना है कि 6 हजार से ज्यादा अवैध ऑटो औद्योगिक नगरी की सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं और प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहे हैं। सड़क पर चलने की अपनी उम्र पूरी कर चुके ये ऑटो से शहर की हवा में लगातार काला धुंआ घोल रहे हैं।

जिले में करीब करीब 15 हजार तिपहियां घूम रहें हैं। इनमें से काफी ऐसे हैं जा ओवर ऐज हो चुके हैं। डीजल चलित इन तिपहियों से आधा धुंआ कच्चा निकलता है, जोकि अत्यंत घातक है। इस आधे जले र्इंधन में 70 प्रतिशत हाइड्रोकार्बन और 30 प्रतिशत कार्बन हवा में घुल जाती है। हालांकि, यह भी कहा जाता है कि इसका कारण घटिया व मिलावटी तेल का र्इंधन प्रयोग करना भी है।
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