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एम्स के बाद अब MIC में सीवीओ विवाद

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अभी एम्स के सीवीओ विवाद का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के सीवीओ का विवाद सामने आ गया है।
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एमसीआई की कार्यप्रणाली और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रवैये से तंग आकर एमसीआई के सीवीओ ने उन्हें मूल कैडर में वापस भेजने का आग्रह मंत्रालय से किया। मंत्रालय ने उनकी समस्याओं को दूर करने की बजाए मूल कैडर में वापस भेजना सही समझा।

लेकिन इस मामले में सीवीसी ने दखल दिया और स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा कि सीवीओ की ओर से उठाए गए सवालों की जांच की जाए और जरूरत पड़े तो उनकी सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस की मदद ली जाए।
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प्रताड़ित करने का आरोप

दस्तावेजों के मुताबिक एमसीआई के चीफ विजलेंस ऑफिसर (सीवीओ) एचके जेठी ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख कर अपनी परेशानियों का जिक्र किया है।

पत्र में कहा गया है कि एमसीआई में भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने पर उन्हें अलग-अलग तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है। सारी स्थिति से मंत्रालय को अवगत कराया गया इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है बल्कि दिनों दिन स्थिति और खराब होती जा रही है।

उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करने में उन्हें एमसीआई और वहां के कर्मचारियों से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है। एमसीआई अपनी कार्यप्रणाली से विजिलेंस डिवीजन जैसी इस संस्था को ही खत्म कर देना चाहती है।

एक साल पहले संभाला कार्यभार

पत्र में लिखा है कि ऐसी स्थिति में यहां काम करना मुश्किल है। लिहाजा उन्हें उनके मूल कैडर (इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री सर्विसेज) वापस भेज दिया जाए। पत्र पर कार्रवाई करने की वजाए स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से उनकी इस अर्जी को कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को भेज दिया गया।

हालांकि जब केन्द्रीय सतर्कता आयोग को इस बात की जानकारी मिली तब आयोग की ओर से मंत्रालय को एक पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश देते हुए कहा गया कि जरूरत पड़े तो उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस की मदद ली जाए।

जेठी ने सात अक्तूबर-2013 को एमसीआई में सीवीओ का कार्यभार ग्रहण किया था। आमतौर पर सीवीओ का कार्यकाल चार वर्ष का होता है।
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प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन को लेकर विवाद बढ़ा

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट बिल का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) विरोध कर रहा है।

इस संबंध में आईएमए की ओर से प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर संशोधित बिल को वापस लेने की मांग की गई है। बिल के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए आईएमए और डीएमए के प्रतिनिधि बृहस्पतिवार को आईएमए मुख्यालय में इकट्ठा हुए।

आईएमए के महासचिव डॉ. नरेंद्र सैनी ने कहा कि नए एमटीपी ड्राफ्ट बिल में प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन का अधिकार होम्योपैथी और आयुर्वेद के चिकित्सकों को भी मिल जाएगा जो पूरी तरह से गलत है। नए बिल से यह अधिकार नर्सों को भी मिल जाएगा। आईएमए इसी संशोधित प्रस्ताव का विरोध कर रहा है।

यह गलत संशोधन है, यदि ऐसा होता है तो गर्भवती के लिए काफी दिक्कत हो जाएगी। टर्मिनेशन के दौरान उनकी जान को खतरा हो सकता है।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल गोयल ने कहा कि पहले प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन 20 सप्ताह तक किया जा सकता था जिसे बढ़कार अब 24 सप्ताह कर दिया गया है। ऐसे में गर्भवती की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। लिहाजा प्रस्तावित संशोधन बिल को पास नहीं किया जाना चाहिए
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