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क्या 'AAP' से डर गई हैं ये बिजली कंपनियां

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बिजली के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की ओर से बुधवार को जारी किए गए श्वेत पत्र को बिजली वितरण कंपनियों ने गंभीरता से लिया है।
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पार्टी की ओर से उठाए गए हर सवाल का जवाब तैयार करने में कंपनियां अभी से जुट गई हैं। डिस्कॉम्स को लगता है अगर आप की सरकार आई तो सबसे पहले बिजली के मुद्दे पर ही मंथन करेगी।

आम आदमी पार्टी की सबसे टेढ़ी नजर बिजली कंपनियों के खातों पर है। हालांकि आप सरकार के निर्देश पर डिस्कॉम्स के खातों की सीएजी जांच अभी चल रही है, लेकिन अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है कि सरकार बनते ही डिस्कॉम्स को जवाब देना पड़े तो इसके लिए कंपनियों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
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कंपनियों के लिए आप के सवाल बने मुसीबत

आप ने कहा है कि बिजली कंपनियों का 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया दिल्ली के उपभोक्ताओं पर है। 11 हजार करोड़ की राशि दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग ने वित्त वर्ष-2011-12 में ही स्वीकार किया था, जबकि वर्तमान में अनुमानित घाटा करीब 27,000 करोड़ तक पहुंच गया है। अगर डीईआरसी इस रकम के आसपास भी घाटा स्वीकार करती है तो उपभोक्ताओं को बिजली काफी महंगी पड़ेगी।

दूसरी ओर डिस्कॉम्स का कहना है कि  दूसरे मेट्रो शहरों की तुलना में दिल्ली में आज भी बिजली की कीमत कम है। डिस्कॉम्स सूत्रों का कहना है कि आदमी पार्टी की ओर से उठाए गए सवालों में कुछ भी नया नहीं है। उसके बावजूद ज्यादातर सवालों के जवाब तैयार हैं।

डिस्कॉम्स का कहना है कि करीब 95 प्रतिशत बिजली सरकारी बिजली उत्पादन कंपनियों से खरीदी जाती है और यह दर सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन द्वारा तय की जाती है और इसकी पूरी जानकारी दिल्ली स्टेट लोड डिस्पैच की वेबसाइट पर होती है।
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