दिल्ली की विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में दस्तावेज व पीड़िता की अस्थि परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टीआर नवल ने दुष्कर्म व अपहरण मामले में आरोपी चंद्रशेखर को आरोप मुक्त कर दिया। अदालत ने पीड़िता को उसके आधार कार्ड, वोटर आईडी व अस्थि परीक्षण के आधार पर बालिग माना था।
पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह अपनी मर्जी से शादी करने आरोपी के साथ गई थी। अदालत ने पीड़िता के स्कूल प्रमाण पत्र पर संदेह जाहिर करते हुए उसका अस्थि परीक्षण करवाया था।
इस रिपोर्ट के मुताबिक अपहरण के समय वह नाबालिग नहीं थी। इस आधार पर अदालत ने प्रमाण पत्र में दी गई उसकी जन्म तिथि को खारिज कर दिया था। अदालत ने दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि आधार कार्ड में पीड़िता के जन्म का वर्ष 1994 है और वोटर आईडी के मुताबिक जनवरी 2013 में 18 वर्ष की है।
अभियोजन के मुताबिक आरोपी चंद्रशेखर ने फरवरी 2013 में पीड़िता को अगवा कर उससे दुष्कर्म किया। पीड़िता की मां ने कहा था कि अपहरण के समय उसकी बेटी की आयु महज 13 वर्ष थी। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में कहा कि वह अपने मर्जी से चंद्रशेखर के साथ गई और उससे शादी की।