लापरवाही पर की गई कार्रवाई
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि शास्त्रीनगर चौकी इंचार्ज की पूर्व में भी कई शिकायतें मिली हैं। महिला से मारपीट मामले में भी लापरवाही मिलने पर चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर किया गया है।
बोले पूर्व पुलिस अफसर...
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी अरविंद जैन ने कहा कि पुलिस को सही धाराओं में पहले ही मुकदमा दर्ज करना चाहिए था। अगर ऐसा नहीं किया है तो वह गलत है। डीजीपी के संज्ञान में आने के बाद ही सही कार्रवाई हो, यह चिंताजनक है। ऐसे प्रकरणों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
छेड़छाड़ के विरोध पर अगर महिला से मारपीट की गई है तो वह और भी जघन्य है। स्थानीय अधिकारियों को पहले ही इसे देखना चाहिए था। छेड़छाड़ की घटना गंभीर घटना मानी जाती है। ऐसे में कम से कम सीओ या इंस्पेक्टर को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए थी। ऐसे मामलों में त्वरित और सही कार्रवाई न करने पर पूरे पुलिस महकमे को बदनामी झेलनी पड़ती है।
पूर्व डीआईजी नवनीत राणा ने कहा कि पुलिस को किसी दबाव में आए बिना कार्रवाई करनी चाहिए थी। किसी भी बड़ी घटना में यह देखना जरूरी है कि अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर जांच की गई है या नहीं।
अगर गंभीर मामले में अधिकारी मौके पर जाकर पड़ताल करेंगे तो बेशक निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई होगी। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो यह दुखद है। किसी राजनीति या रसूख के दबाव में आकर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
संस्कारों की जरूरत, लैंगिक संवेदना के प्रति पुलिस को किया जाए दक्ष
वीएमएलजी पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीना शुक्ला का कहना है कि महिलाओं के प्रति लोगों की संवेदनशीलता खत्म होती जा रही है। एक महिला को सार्वजनिक तौर पर पीटना संस्कारहीनता का उदाहरण है। घटना के वक्त मूकदर्शक बनकर खड़े रहना सामाजिक मूल्यों में आई कमी को दर्शाता है। ऐसे में समाज को संस्कारों की सख्त जरूरत है।
घरों में बच्चों व युवाओं को महिला का सम्मान करना सिखाना चाहिए। स्कूल लेवल से बच्चों को नैतिक शिक्षा का ज्ञान देना जरूरी है। लोगों को अपने बच्चों व परिवार के सदस्य को सामने रखकर दूसरों की मदद करनी चाहिए। साथ ही पुलिस को अपनी जिम्मेदारी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ निभाने की जरूरत है। इससे अपराधियों के मन में डर पैदा होगा।
समाजशास्त्रियों के सुझाव:
- स्कूल और घर में पढ़ाया जाए नैतिक मूल्यों और संस्कार का पाठ
- भारतीय संस्कृति और सर्वधर्म समभाव की दी जाए सीख
- सामाजिक हस्तक्षेप खत्म होना खतरनाक, उठाएं आवाज
- लैंगिक संवेदना के प्रति पुलिस को किया जाए दक्ष
- ईमानदारी, सतर्कता व संवेदनशीलता के साथ पुलिस करें ड्यूटी, बढ़ेगा कानून का डर