अदालत ने रेप और जान से मारने की धमकियां देने के मामले में बयानों से पत्नी के मुकरने पर पति को बरी कर दिया। महिला ने कहा कि उसने अपनी इच्छा से युवक से विवाह किया था और खुश है, जबकि परिवार के दबाव में रेप का झूठा मामला दर्ज करवाया था।
द्वारका अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित पीड़िता ने अभियोजन पक्ष के मामले के विपरीत बयान दिया है। उसने कहा है कि वह युवक के साथ खुशी से रह रही है। ऐसे में इस मुकदमे को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में अदालत आरोपी को बरी करती है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला ने अभियुक्त पर विवाह का झूठा वादा कर रेप करने का आरोप लगाया था। महिला ने 15 जून 2014 को की शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे नौ दिन तक बंधक बनाकर रेप किया। महिला ने कहा कि इसके बाद उसे बस स्टैंड पर फेंककर यह कहते हुए भाग गया कि दोस्त से पैसे लेने के बाद वापस आएगा। इसके बाद फोन पर धमकी दी कि अगर इस घटना के बारे में किसी को बताया कि उसे मार दिया जाएगा।