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अभिनव को वापस लाने के लिए चली बड़ी मुहिम

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दिल्ली में तीन साल की जाह्नवी के गायब होने और सात दिन बाद मिलने की घटना ने राजधानी को झकझोर दिया था।
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इसके बाद 26 सितंबर को नोएडा के सेक्टर-57 बिशनपुरा से गायब हुए अभिनव को वापस लाने के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने अभियान चला दिया है।

वहीं, शहर के सामाजिक संगठन भी इस मुहिम में जुट गए हैं। फेसबुक से लेकर व्हाट्स एप, ट्विटर जैसी सोशल साइटस पर अभिनव को खोजने की मुहिम आगे बढ़ रही है।

एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि डेढ़ साल के अभिनव को लाने के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस की ओर से 12 टीमें गठित की गई हैं। इनमें सामाजिक संगठनों की टीमें भी जुटी हुई हैं।

नौ जिलों में भेजी गईं

उनका कहना है कि अभिनव और उस जैसे बहुत सारे गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए नौ जिलों दिल्ली, फरीदाबाद, गुड़गांव, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर आदि में टीमें भेजी जा रही हैं। शहर में भी पुलिस बच्चे की तलाश कर रही हैं।

विशेष रूप से मेट्रो स्टेशनों, बस स्टैंडों और अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वर्दीधारी पुलिस के अलावा सादी वर्दी में भी पुलिस पूछताछ कर रही है। झुग्गियों और घनी बस्तियों में भी सादी वर्दी में पुलिस के लोग बच्चे की तलाश कर रहे हैं।

सोशल साइट्स पर फोटो हो रहीं शेयर
जाह्नवी की तरह अभिनव को तलाशने के लिए सोशल साइट्स पर उसकी फोटो उसकी पहचान सहित अपलोड की गई है। लोगों से उसकी फोटो अधिक से अधिक शेयर करने की अपील की गई है।

इस काम में अभिनव के परिजन, नोएडा के सामाजिक संगठन, मीडिया के लोग ही नहीं बल्कि पुलिस के लोग भी सोशल साइट्स पर इस मुहिम को चला रही है।

इनसे नौनिहालों को बड़ा खतरा

नोएडा में गुमशुदा बच्चों की फेहरिस्त जहां लंबी होती जा रही है, वहीं इनका मिलना बड़ी बात है। भीख मंगवाने वाले गिरोहों से नौनिहालों का बड़ा खतरा बना हुआ है।

साथ ही मदारी, सपेरे और कबाड़ी बनकर कॉलोनियों और सोसायटी के चक्कर लगाने वाले भी बच्चों के बड़े दुश्मन बन गए हैं। अक्सर बच्चा चुराने वाली वारदात में पता चलता है कि इनमें से कोई जरूर आसपास से गुजरा था।

26 सितंबर को बिशनपुरा क्षेत्र से गायब होने वाले डेढ़ वर्ष के अभिनव के मामले में भी दोपहर में एक बंदर नचाने वाला मदारी उनके घर के पास से निकला था। इस दौरान बच्चा गेट के पास में खेल रहा था। मदारी के जाने के बाद से ही बच्चा गायब हो गया जो अब तक नहीं मिला है।

भीख मंगवाने वाले गिरोह करते हैं बच्चे चोरी

पूर्व की घटनाओं में देखा गया है कि भीख मंगवाने वाले गिरोह नौनिहालों को गायब कर देते हैं। इसके बाद छोटे बच्चों को नशा खिलाकर सुला दिया जाता है।

बच्चे सोए रहते हैं और भीख मांगने वाली महिलाएं इनकी बीमारी का बहाना बनाकर लोगों से भीख मांगती है। अक्सर दिल्ली-नोएडा के चौराहों पर इस तरह की महिलाएं देखी जा सकती हैं। वहीं, बड़े होने पर बच्चों को भीख मांगने या चोरी के लिए पारंगत कर दिया जाता है।

मदारी, सपेरे या खिलौने वाले करते हैं आकर्षित
बच्चों को घर के बाहर अकेले न खेलने दें। अक्सर बंदर का नाच दिखाने वाले मदारी, सपेरा या खिलौने वाले बच्चों को आकर्षित कर उन्हें अपने साथ ले जाते हैं। बच्चे कुछ देर रोते भी नहीं हैं और इन बहरूपियों के साथ चल देते हैं।
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स्कूल, पार्क और अस्पताल में बच्चा चोरों के अड्डे

स्कूलों के आसपास, शाम को पार्कों और अस्पतालों में बच्चा चोरों के अड्डे होते हैं। पिछले साल सेक्टर-12 में एक स्कूल के बाहर से बच्चा गायब हो गया था। वहीं, वर्ष 2012 में जिला अस्पताल में एक इलाज कराने आई महिला की तीन वर्षीय बच्ची गायब हो गई थी, जिसकी रिपोर्ट थाना सेक्टर-20 में दर्ज कराई गई थी।  

अंग बेचने वालों का भी रैकेट
अवैध रूप से शरीर के अंग बेचने वाले गिरोहों पर भी बच्चा चोरी करने का शक जाता रहा है।

निठारी कांड
वर्ष 2006 के दिसंबर में खुला निठारी कांड पूरे विश्व में बच्चों के गायब होने के मामले में विश्वभर में चर्चा का विषय बन चुका है। ऐसे में दोबारा से बच्चों का गायब होना एक बड़ी चुनौती है। कहीं ऐसा ही कोई कांड तो कहीं नोएडा में दूसरी जगह नहीं पनप रहा है।
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