दिल्ली विधानसभा चुनाव की जंग में किस प्रत्याशी को उतारा जाए, इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों में मंथन का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस व भाजपा की 70 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों को लेकर मैराथन बैठक शनिवार से ही जारी है, लेकिन अभी तक प्रत्याशियों का चयन नहीं कर सकी। उम्मीद है कि 14 जनवरी को तीनों पार्टियां प्रत्याशियों की सूची जारी कर सकती हैं। सभी पार्टियां प्रत्याशियों के चयन को लेकर विशेष सावधानी रख रही हैं।
प्रदेश भाजपा चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर के आवास पर शनिवार देर रात से ही बैठक का दौर शुरू हो गया था। रविवार को भी प्रत्याशियों के नाम पर चर्चा हुई, लेकिन मैराथन बैठक में 40-45 विधानसभाओं को लेकर ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी।
दरअसल पार्टी पदाधिकारियों के सामने एक सीट पर 10-10 लोगों ने दावेदारी पेश की है। उधर अन्य राजनीतिक पार्टियों की सूची शामिल नहीं होने की वजह से भी पार्टी फाइनल सूची तैयार नहीं कर पा रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, देर रात तक प्रदेश भाजपा इकाई की तरफ से सूची तैयार की गई, जो सोमवार को पार्टी हाईकमान को सौंपी जाएगी। इस सूची में भी 3-4 नाम शामिल होंगे। इस सूची पर राष्ट्रीय नेतृत्व सोमवार और मंगलवार को मंथन करके प्रदेश चुनावों के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करेगा।
बैठक में जीत के पैमाने पर खास चर्चा की जा रही है। ट्रैक रिकॉर्ड के साथ ही इलाके में लोकप्रियता व स्वच्छ छवि पर भी चर्चा की गई। भाजपा सूत्रों के अनुसार, 70 में से 20-25 विधानसभा क्षेत्रों के लिए संभावित प्रत्याशियों पर लगभग सभी ने सहमति दे दी है।
उधर, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने भी प्रत्याशियों के चयन के लिए बैठक की। शनिवार देर रात तक तो कांग्रेस ने 20 प्रत्याशियों की सूची तैयार कर ली थी। रविवार को भी बाकी बची सीटों पर चर्चा की गई।
आम आदमी पार्टी को भी 50 प्रतिशत सीटों के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पार्टी सूत्रों की मानें तो सभी उत्तरायणी (14 जनवरी) का इंतजार कर रहे हैं। 14 जनवरी से नामांकन शुरू हो रहा है और इसी दिन पार्टी अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करें।
मैदान में 30 से अधिक युवा चेहरे उतारेगी कांग्रेस
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस बार युवा चेहरों को अधिक तवज्जो दे रही है। माना जा रहा है कि 70 विधानसभा क्षेत्रों में 30 से अधिक युवा चेहरे होंगे। पहले चुनाव में दूसरे स्थान पर रह चुके उम्मीदवार, पूर्व और मौजूदा पार्षदों सहित इस बार 7-8 नए चेहरे भी चुनावी रण में उतर सकते हैं। इनमें कई कांग्रेसी नेताओं के पुत्र-पुत्री या रिश्तेदार हैं। पार्टी की प्राथमिकता उन उम्मीदवारों को टिकट देने की है, जिनकी जीत की संभावनाएं प्रबल हैं।