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शिक्षक केवल शिक्षक है, उसकी जाति नहीं होती : प्रो योगेश सिंह

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-डीयू कुलपति ने सामाजिक सद्भाव को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों से किया संवाद
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
दिल्ली विश्वविद्यालय में बीते सप्ताह अधिकार रैली के दौरान दो समूहों के बीच हुए हंगामे के बाद कुलपति प्रो योगेश सिंह ने सोमवार को शिक्षकों व छात्रों के साथ संवाद किया। इस संवाद में डीयू कुलपति ने कहा कि शिक्षक की कोई जाति नहीं होती, उसकी जाति पढ़ाना है। किसी शिक्षक का अपने सहयोगी या छात्रों के साथ भेदभाव करना ठीक नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से कैंपस में इस बात का ध्यान रखने को कहा कि ऐसी घटना ना हो जिससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचे।

कुलपति ने कॉलेजों व विभागों के विभिन्न वर्गों के शिक्षकों और विद्यार्थियों से अलग-अलग संवाद किया। कुलपति ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे ध्यान रखें कि विश्वविद्यालय में कोई भी ऐसी अप्रिय घटना न हो जिससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचे। विद्यार्थियों को भी समझाएं और स्वयं भी इस विषय इस पर गंभीरता से ध्यान दें। कुलपति ने कहा कि यूजीसी के जो नए नियम आए हैं वह अभी माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्हें लेकर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं की जानी चाहिए।
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इस अवसर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी वुमेन्स एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रो गीता सहारे ने कहा कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए शिक्षकों की अहम भूमिका है। हम बच्चों को समझाएं कि यह देश हमारा है। गांधी भवन के निदेशक प्रो केपी सिंह ने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि डीयू कुलपति गत दिनों विश्वविद्यालय में हुई अप्रिय घटना को लेकर बहुत गंभीर हैं। इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो रजनी अब्बी, चीफ विजिलेंस ऑफिसर गजेन्द्र सिंह, चेयरमैन इंटरनेशनल रिलेशन प्रो नीरा अग्निमित्रा, प्रॉक्टर प्रो मनोज कुमार और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो रंजन त्रिपाठी ने सामाजिक सद्भाव मजबूत करने पर अपने-अपने विचार रखे।
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