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एक नगर, जहां जाने के बाद दोबारा सरकार नहीं बनती!

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यह मामना किसी और का नहीं, बल्कि देश के सबसे युवा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का है, जो हाल ही में सैफई महोत्सव के दौरान बॉलीवुड के नामचीन सितारों का नाच-गाना देख रहे थे।
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दरअसल, 12 जनवरी को उत्तर प्रदेश के जिले में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक कार्यक्रम में न केवल शामिल होंगे बल्कि एक महत्वकांक्षी विशेषज्ञों की बैठक का उद्घाटन और संबोधन भी करेंगे।

लेकिन इस दौरान जिले में उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री मौजूद नहीं रहेंगे। इसका कारण कोई राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि वह धारणा है, जिसके चलते शायद इस नगर नहीं आना चाहते।
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पिता की वजह से बन गई ऐसी धारणा!

धारणा यह है कि जिले में जिस मुख्यमंत्री ने कदम रखा, वह दोबारा सत्ता में नहीं आया। उनका मनना है कि जो इस नगर में किसी कार्यक्रम शामिल होता है, अगली बार उसकी सरकार नहीं बनती।

दरअसल, सबसे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए नारायण दत्त तिवारी इस आए थे, लेकिन इसके बाद वे कभी इस पद पर रहते हुए जिले में नहीं आ सके। सत्ता में वे दोबारा नहीं आए। यही हाल बसपा सुप्रीमो मायावती और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का भी हुआ।

इतना ही नहीं सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव भी इस धारणा का शिकार हो चुके हैं। सत्ता में रहते हुए उन्होंने दादरी में चुनावी सभा की थी। इसके बाद सपा सरकार में नहीं आ सकी और वे दोबारा मुख्यमंत्री बनकर इस नहीं आ सके। ऐसे में यह बात लोगों के जेहन में घर कर गई है कि जो मुख्यमंत्री यहां आता है, वह दोबारा सरकार में नहीं आ पाता है।

कौन है वो नगर?

ये नगर उत्तर प्रदेश के उस इलाके से सटा हुआ है एक जिला है, जो प्रदेश के लिए सबसे अधिक रेवेन्यू जेनरेट करता है। इस जिले का नाम है 'गौतमबुद्ध नगर'। 12 जनवरी को यहां के एक्सपो मार्ट में आयोजित पेट्रो मीट का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे। इसमें कई पेट्रो विशेषज्ञों की एक मीटिंग की जाएगी, जिसमें पेट्रोलियम संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

यहीं नहीं देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद इस बैठक का उद्घाटन करेंगे और मीट को संबोधित भी करेंगे। ऐसे में सीएम का आना चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में इसे समाजवादी पार्टी के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। दरअसल, इन दिनों उत्तर प्रदेश सरकार मुजफ्फर दंगे और सैफई महोत्सव को लेकर चौतरफा घिरी हुई है। ऐसे में एक धारणां के चलते इस तरह के कार्यक्रम से दूर रहना लोगों को अखर रहा है।

अखिलेश एक बार पहले भी ऐसा कर चुके हैं!

देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री ऐसा पहली बार नहीं कर रह हैं। वह पहले भी ऐसा कर चुके हैं। इसी मीट के लिए हुई एक आवश्यक बैठक में वो शामिल नहीं हुए थे। दरअसल, करीब आठ माह पूर्व एक्सपो मार्ट में आयोजित एडीबी की बैठक में भी प्रधानमंत्री आए थे, लेकिन उस समय भी मुख्यमंत्री यहां नहीं पहुंचे थे।

बता दें कि 15 जनवरी तक आयोजित होने वाली पेट्रो मीट में पेट्रोलियम पदार्थों व गैस के बारे में चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में कई देशों के ऊर्जा मंत्री और राजदूत समेत करीब चार हजार प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसमें से सात सौ प्रतिनिधि विदेशी होंगे।
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फिर कौन करेगा पीएम का वेलकम?

जब एक धारणां की वजह से सीएम अखिलेश यादव गौतमबुद्ध नगर में पीएम का स्वागत करने नहीं पहुंच रहे हैं, तो फिर उनका वेलकम कौन करेगा, यह बड़ा सवाल है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के स्थान पर प्रदेश सरकार के कोई मंत्री ही प्रधानमंत्री की अगुवानी करेंगे। इससे पहले ही सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करना शुरू कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को एक अस्थायी चौकी एक्सपो मार्ट में बना दी गई है। पीएम की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चार एसपी, आठ एएसपी, 21 डीएसपी, 50 इंस्पेक्टर, 200 सबइंस्पेक्टर, 800 सिपाही, पांच कंपनी पीएसी और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों समेत डेढ़ हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
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