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Delhi NCR News: चार साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले को ताउम्र कैद, सजा-ए-मौत से कोर्ट का इन्कार

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रोहिणी कोर्ट ने कहा-दुर्लभतम की श्रेणी में नहीं, पीड़िता को 13.5 लाख मुआवजा देने का आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और अपहरण के दोषी 22 वर्षीय सनी कुमार को मौत की सजा देने से इन्कार करते हुए उसकी शेष पूरी जिंदगी जेल में बिताने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि मामला गंभीर और संवेदनशील होने के बावजूद रेयरेस्ट ऑफ रेयर (दुर्लभतम) की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड उचित नहीं माना जा सकता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान दोषी की उम्र, उसके आपराधिक रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि दोषी की उम्र महज 22 वर्ष है और उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। साथ ही उसने अपने किए पर पछतावा भी व्यक्त किया है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मृत्युदंड के बजाय शेष जीवन के लिए कारावास की सजा तय की।
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इससे पहले 30 अप्रैल को अदालत ने सनी कुमार को बच्ची के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराया था। मामले में अभियोजन पक्ष ने दोषी के लिए मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

कोर्ट ने पीड़ित बच्ची के पुनर्वास के लिए 13.5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया। अदालत ने बताया कि पांच लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि पीड़िता के पुनर्वास और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए आर्थिक सहायता बेहद जरूरी है, ताकि बच्ची के उपचार और देखभाल में किसी प्रकार की बाधा न आए।
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अदालत की टिप्पणियां
अदालत ने कहा कि पीड़ित बच्ची को अत्यंत क्रूर और जानलेवा चोटें पहुंची थीं, जो बेहद गंभीर यौन हिंसा का संकेत हैं। बच्ची ने जिस शारीरिक और मानसिक पीड़ा का सामना किया है, उसकी कल्पना करना भी कठिन है। कई सर्जरी और लंबे समय तक उपचार की प्रक्रिया किसी भी बच्चे के लिए बेहद कष्टदायक होती है।
-दोषी के कृत्य अत्यंत अमानवीय और निंदनीय हैं तथा ऐसे अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
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