सीही गांव निवासी 43 वर्षीय महेंद्र प्रकाश मल्टीनेशनल कंपनी में प्रबंधक की नौकरी छोड़ कर गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का दीप जला रहे हैं। झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले, कूड़ा करकट बीनने वाले बच्चों को शिक्षा देने का काम पिछले 15 वर्ष से कर रहे हैं।
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एमए अर्थशास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट महेंद्र ने नौकरी छोड़कर एक पेड़ के नीचे पढ़ा कर बच्चों को शिक्षा देने का काम शुरू किया। ग्रामीण व कंवर शिक्षा समिति के सहयोग से बच्चों की संख्या बढ़ती गई।
वर्तमान में 115 जरूरतमंद गरीब बच्चों को कक्षा पहली से आठवीं तक की शिक्षा निशुल्क दे रहे हैं। महेंद्र प्रकाश ने एमडीयू रोहतक से अर्थशास्त्र में एमए किया। उसके बाद नौकरी लग गई। वहां मन नहीं लगने पर गांव वापस लौट आए।
एक पेड़ के नीचे बच्चों को शिक्षा देने का काम शुरू किया। अब महेंद्र अपनी पत्नी ममता के साथ बच्चों को जोड़ने में लगे हुए है। यह वर्तमान सेक्टर-8 बाईपास रोड पर एक स्कूल चलाकर गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देकर जिंदगी संवारने का काम कर रहे हैं।
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अब गांव के लोग बच्चों को शिक्षण सामग्री देकर प्रोत्साहित कर रहे हैं। महेंद्र प्रकाश कहते है कि वह खुशनसीब हैं कि उन्हें गरीब बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला है।