सड़क पर रहने वाले बच्चों के भविष्य की खातिर...
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सड़क पर रहने वाले बच्चों की पढ़ाई के लिए नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम में फैशन फॉर ए कॉज 2024 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लक्ष्यम समूह की इस पहल पर महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली संस्था फिक्की फ्लो दिल्ली और धन मिल का सहयोग रहा। अमर उजाला ने इस कार्यक्रम में एक्सीलेंस पार्टनर की भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में वरुण बहल, शांतनु निखिल और रोहित बल के डिजाइन किए हुए परिधानों को पहनकर 47 मॉडल्स ने फैशन फॉर ए कॉज के अंतर्गत रैंप वॉक किया। ये सभी मॉडल्स व्यवसाय जगत, सोशल मीडिया एनफ्लुएंसर, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग महत्वपूर्ण हैं, जो सड़क पर रहने वाले बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड इकट्ठा करने की मुहिम में लक्ष्यम का सहयोग करने के लिए आगे आए हैं।
यहां लक्ष्यम की फाउंडर राशि आनंद ने फिक्की फ्लो दिल्ली की प्रेसीडेंट दिव्या जैन और धन मिल की गुंजन के साथ मिलकर तीनों डिजाइनर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। अन्य सहयोगियों का भी सम्मान किया गया।
फंड देने के लिए नए लोग जुड़े
राशि आनंद ने कहा कि वह इस कार्यक्रम के जरिए कम से कम 100 बच्चों के लिए फंड इकट्ठा करना चाहती हैं। इस कार्यक्रम के जरिए भारी संख्या में नए लोग भी जुड़े हैं। दिव्या जैन ने कहा कि राशि और सक्षम की पूरी टीम बधाई की पात्र है। देश में करीब 11 मिलियन बच्चे स्ट्रीट्स पर रहते हैं। अकेले दिल्ली में ही 3-4 हजार बच्चे सड़कों पर रहते हैं। लक्ष्यम ने करीब 700 बच्चों को पूरे भारत से लिया है और इनकी पढ़ाई का जिम्मा उठाया है। इस कार्यक्रम में करीब 200 बच्चों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बैग, कैंडल, फूलों इत्यादि की प्रदर्शनी लगाई गई। गीत-संगीत का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
पता-लापता का ट्रेलर लॉन्च
लक्ष्यम समूह और अंडरडॉग मोशन पिक्चर्स ने एक डॉक्यूमेंट्री ड्रामा ‘पता-लापता’ का निर्माण किया है, जो इस देश के युवाओं के वास्तविक जीवन की पड़ताल करती है। फैशन फॉर ए कॉज 2024 में फिल्म की घोषणा और ट्रेलर लॉन्च किया गया। फिल्म ने कांस वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल 2024 में सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ वॉयस ओवर की श्रेणी में दो पुरस्कार जीते हैं। इस फिल्म को लेकसिटी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024 और दरभंगा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024 के लिए भी चुना गया है। मध्य और दक्षिणी दिल्ली में हजारों लोग जो कि बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी, शौचालय और बिजली के बिना रह रहे हैं। ये फिल्म ऐसे लोगों की सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने और इनके परिवारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश है।