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Boycott Kisan Andolan : हरियाणा के किसान संगठन आंदोलन से दूर, चरखी की खापों ने भी दिल्ली कूच से किया किनारा

Mon, 12 Feb 2024 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/दिल्ली

सार

ये संगठन किसानों की मांगों का समर्थन जरूर करते हैं, लेकिन आंदोलन का नहीं। खास बात ये है कि हरियाणा के ये संगठन आंदोलन का विरोध भी नहीं कर रहे, बल्कि पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है। 
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किसान आंदोलन ( file pic) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पंजाब के किसान संगठनों के 13 फरवरी के दिल्ली कूच आंदोलन से हरियाणा के प्रमुख किसान संगठनों ने किनारा कर लिया है। ये संगठन किसानों की मांगों का समर्थन जरूर करते हैं, लेकिन आंदोलन का नहीं। खास बात ये है कि हरियाणा के ये संगठन आंदोलन का विरोध भी नहीं कर रहे, बल्कि पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है। 

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इस आंदोलन में हरियाणा से अंबाला के भाकियू शहीद भगत सिंह संगठन और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेता अभिमन्यु कोहाड़ ही शामिल हुए हैं। दरअसल, हरियाणा के किसान संगठनों को इस बात को लेकर आपत्ति है कि आंदोलन के लिए उनको निमंत्रण नहीं दिया गया और न ही रूपरेखा तैयार करते समय कोई राय ली गई। ऐसे में बिना किसी रणनीति और तैयारी के आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया जा सकता।

पिछले किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले और हरियाणा पंजाब के किसानों का नेतृत्व करने वाले गुरनाम सिंह चढूनी इस आंदोलन से दूर हैं। चढ़ूनी का कहना है कि वह किसानों की मांगों का समर्थन करते हैं, लेकिन आंदोलन का नहीं। क्योंकि आंदोलन से पहले पूरी तैयारी करनी होती है।  चढूनी ने कहा कि वे खुद मानते हैं कि सरकार ने वादाखिलाफी की है, लेकिन ये तो सभी संगठनों के साथ की है।
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सरपंचों को भी आह्वान का इंतजार
हरियाणा सरपंच एसोसिएशन ने आंदोलन का समर्थन किया है। हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर समैण का कहना है कि आंदोलन में मदद के लिए सरपंच तैयार हैं। क्योंकि हम खुद सभी किसान हैं। अगर किसान संगठन मदद और आंदोलन में हिस्सेदारी के लिए आह्वान करते हैं कि वह तैयार हैं। सरपंचों से भी मदद का आह्वान किया जाएगा। उधर, खाप पंचायतों ने भी आंदोलन को लेकर अभी पत्ते नहीं खोले गए हैं।

किसी भी आंदोलन का समर्थन और विरोध तब होता है, जब किसी ने कोई राय ली हो। ये आंदोलन हमारे से बिना किसी सलाह के शुरू किया जा रहा है। इसलिए हम इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। जहां तक मांगों की बात है तो वो सरकार को पूरी करनी चाहिए।
- रतन मान, प्रदेश अध्यक्ष (टिकैत), भाकियू।

चरखी की खापों ने दिल्ली कूच से किया किनारा
चरखी दादरी में किसान संगठनों के 13 फरवरी को दिल्ली कूच के आह्वान से जिले की खापों ने किनारा कर लिया है। इसकी मुख्य वजह संयुक्त किसान मोर्चा से कोई निर्देश नहीं मिलना है। हालांकि खापों ने दिल्ली कूच करने वाले किसान संगठनों के मांगों का समर्थन किया है।

सांगवान खाप-40 और फोगाट खाप-19 के पदाधिकारियों का कहना है कि किसान आंदोलन के दौरान जिले की खापों ने संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देशों का पालन किया। 13 फरवरी के दिल्ली कूच आह्वान के संबंध में इस बार कोई निर्देश नहीं मिले हैं। इसके चलते खाप पदाधिकारियों ने आपसी मंत्रणा तक नहीं की है। दोनों खापों के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 13 फरवरी को दिल्ली कूच नहीं करेंगे। 

कहा- इस संबंध में नहीं मिले दिशा-निर्देश  
13 को सांगवान खाप-40 दिल्ली कूच नहीं करेगी। संयुक्त किसान मोर्चा का कोई निर्देश मिलने पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
- नरसिंह सांगवान, सचिव, सांगवान खाप-40

13 को दिल्ली कूच का आह्वान कुछ संगठनों का है न कि संयुक्त किसान मोर्चा का। खापों का सहयोग पीछे से आंदोलन को मजबूत करने का होता है। एसकेएम ने दिल्ली कूच के आह्वान के संबंध में कोई आदेश जिले की किसी खाप को नहीं दिए हैं।
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- बलवंत फोगाट, प्रधान, फोगाट खाप-19

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