फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: कार से 130 गुना ज्यादा पीएम 2.5 छोड़ता है डीजल मालवाहक वाहन

विज्ञापन
विज्ञापन
सीएक्यूएम के विश्लेषण में चौंकाने वाला खुलासा, एनसीआर के सक्रिय वाहनों में सिर्फ 1.2 फीसदी हिस्सेदारी फिर भी पीएम उत्सर्जन में 3.3 फीसदी योगदान, नए पंजीकरण पर चरणबद्ध रोक
विज्ञापन


धनंजय मिश्रा

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में हल्के मालवाहक वाहनों (एलजीवी) को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बीएस-6 डीजल एलजीवी एक बीएस-6 सीएनजी यात्री कार की तुलना में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले अति सूक्ष्मकणों- पीएम2.5 का 130 गुना से अधिक उत्सर्जन करता है। वहीं, बीएस-6 सीएनजी एलजीवी का पीएम2.5 उत्सर्जन समान श्रेणी की यात्री कार के मुकाबले 57 गुना से अधिक है। इसके बाद आयोग ने नए मालवाहक वाहनों के पंजीकरण को चरणबद्ध तरीके से स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने का फैसला किया है।
एनसीआर के सक्रिय वाहन बेड़े में एलजीवी की हिस्सेदारी सिर्फ 1.2 फीसदी है, जबकि पीएम उत्सर्जन में इनका योगदान करीब 3.3 फीसदी है। दिल्ली में यह योगदान अनुमानित 5.1 फीसदी है। सीएक्यूएम के अनुसार, ई-कॉमर्स, कूरियर, लॉजिस्टिक्स, एफएमसीजी वितरण और शहरी माल ढुलाई में इनके बढ़ते इस्तेमाल के कारण कम संख्या के बावजूद इनका प्रदूषण प्रभाव अधिक है।
विज्ञापन

2027 से दिल्ली में नया डीजल-सीएनजी मालवाहक नहीं
सीएक्यूएम के आदेश के मुताबिक दिल्ली में 3.5 टन तक के एन1 श्रेणी के नए डीजल, पेट्रोल और सीएनजी मालवाहक वाहनों का पंजीकरण 1 जनवरी 2027 से बंद होगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में यह नियम 1 जुलाई 2027 से लागू होगा। एनसीआर के बाकी जिलों में नए डीजल-पेट्रोल एन1 वाहनों पर 1 जनवरी 2028 से रोक लगेगी। हालांकि, मौजूदा वाहनों को तत्काल हटाने का प्रावधान नहीं है।
-3.5 से 7.5 टन तक के एन2 वाहनों पर भी चरणबद्ध रोक लगेगी। दिल्ली में 1 जनवरी 2028 और बाकी एनसीआर में 1 जनवरी 2029 से नए डीजल, पेट्रोल और सीएनजी एन2 वाहनों का पंजीकरण नहीं होगा।2025 में दिल्ली-एनसीआर में एन2 श्रेणी के 2,744 नए वाहन पंजीकृत हुए, लेकिन इनमें एक भी इलेक्ट्रिक वाहन नहीं था।
सीएनजी मालवाहकों पर रोक के फैसले की समीक्षा जरूरी
परिवहन विशेषज्ञ डॉ. अनिल छिकारा ने 2027 से बीएस-6 सीएनजी एलजीवी के नए पंजीकरण पर रोक की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि कई मालवाहक 300 किलोमीटर तक चलते हैं और भार व दूरी के लिहाज से फिलहाल सीएनजी के व्यावहारिक विकल्प सीमित हैं। 2025-26 में बड़ी संख्या में सीएनजी मालवाहक बिना किसी प्रोत्साहन के खरीदे गए। उनके मुताबिक ईवी को दूसरे विकल्प बंद करके नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक और परिचालन क्षमता के आधार पर बढ़ावा देना चाहिए। 3.5 टन से अधिक के वाहनों के लिए भी आर्थिक व परिचालन व्यवहार्यता का अध्ययन जरूरी है।
सबसे ज्यादा असर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर
फैसले का असर छोटे ट्रांसपोर्टरों और मालिक-चालकों पर अधिक पड़ सकता है। एक-दो वाहनों पर निर्भर कारोबारियों को वाहन बदलने पर इलेक्ट्रिक विकल्प अपनाना होगा। चुनौती इसलिए भी है क्योंकि एलजीवी केवल शहर के भीतर छोटी दूरी के लिए नहीं चलते, बल्कि मंडियों, दुकानों, ई-कॉमर्स, कुरियर और स्थानीय आपूर्ति के साथ लंबी दूरी की ढुलाई में भी इस्तेमाल होते हैं।
-एन1 श्रेणी में नौ कंपनियों के 20 इलेक्ट्रिक मॉडल उपलब्ध हैं, लेकिन एन2 में 2025 के दौरान एक भी इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत नहीं हुआ। ऐसे में बड़े मालवाहकों के लिए चार्जिंग ढांचे, रेंज, लोड क्षमता और परिचालन लागत को लेकर व्यावहारिक विकल्प तैयार करना इस नीति की सफलता के लिए अहम होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें