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Delhi: 77 तालाबों का 90 दिनों में होगा कायाकल्प, तीन चरणों में पूरा होगा जलाशयों को जीवन देने का मास्टर प्लान

Sun, 10 May 2026 02:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने डीडीए को इसे मिशन मोड में काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उपराज्यपाल ने प्राधिकरण को चेतावनी दी है कि अगले 90 दिनों के भीतर इन जलाशयों की सूरत बदल जानी चाहिए।
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विस्तार
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गहराते जल संकट को देखते हुए सूख रहे 77 जलाशयों (तालाबों और झीलों) का कायाकल्प होगा। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने डीडीए को इसे मिशन मोड में काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उपराज्यपाल ने प्राधिकरण को चेतावनी दी है कि अगले 90 दिनों के भीतर इन जलाशयों की सूरत बदल जानी चाहिए।

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अधिकारियों के साथ शनिवार को समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि रख-रखाव की कमी और अवैध कब्जों के कारण दिल्ली की जलीय संपत्तियां तेजी से खत्म हो रही हैं। एलजी ने निर्देश दिए कि इन जलीय संपत्तियों को बचाने के लिए तुरंत ठोस योजना जमीन पर उतारी जाए, ताकि बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोका जा सके।

तीन चरणों में होगा काम
प्रशासन ने इन 77 जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए समय सीमा तय की है, जिसे सख्ती से लागू किया जाएगा। अगले 30 दिन सबसे पहले उन 6 जलाशयों पर काम होगा, जिनमें केवल सफाई और खुदाई की जरूरत है। 60 दिनों के भीतर 48 छोटे जलाशयों का कायाकल्प किया जाएगा, जहां गंदगी हटाकर गहराई बढ़ाई जाएगी। 90 दिनों के भीतर 23 बड़े जलाशयों को पूरी तरह से ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है।
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दो हिस्सों में बंटा है काम का तरीका
पहला चरण सफाई और खुदाई से जुड़ा होगा। सबसे पहले जलाशयों की गहराई में जमी कीचड़ और गंदगी को मशीनों से बाहर निकाला जाएगा। इसके आसपास के उन रास्तों को भी साफ किया जाएगा जहां से बारिश का पानी बहकर तालाब में आता है। इसका मकसद बारिश का ज्यादा पानी तालाबों में इकट्ठा हो सके।

दूसरा चरण सौंदर्यीकरण और सुरक्षा का होगा, जब तालाबों में पानी रुकने लगेगा तब उनके किनारों को मजबूत किया जाएगा। तालाब के चारों ओर बाड़ लगाई जाएगी, पेड़-पौधे रोपे जाएंगे और गंदे पानी को साफ करने के लिए छोटे ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, ताकि पानी स्वच्छ रहे।

झीलें पर्यावरण के लिए अनमोल
उपराज्यपाल ने कहा कि ये झीलें और तालाब दिल्ली के पर्यावरण के लिए अनमोल हैं। इस योजना से आम लोगों को सीधा लाभ होगा, भूजल स्तर में सुधार होगा। तालाबों में पानी भरने से जमीन के नीचे का जल स्तर बढ़ेगा, जिससे बोरवेल और हैंडपंपों में पानी की कमी दूर होगी।

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