दिल्ली कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की लॉ की फर्जी डिग्री के मामले को दिल्ली बार कांउसिल ने गंभीरता से लिया है। काउंसिल ने तोमर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
तोमर की बीएससी की डिग्री को लेकर काउंसिल ने पहले ही जवाब मांगा है। काउंसिल के चेयरमैन केके मनन ने बताया कि इस तथ्य के सामने आने पर हमने इस पर संज्ञान लिया है और कानून मंत्री तोमर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो मामला काफी गंभीर है और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। काउंसिल में अब तोमर के मामले की जांच 8 मई को होगी।
आप ने नहीं कराई आंतरिक लोकपाल से जांच
आम आदमी पार्टी जो हर बात पर जांच की बात करती है उसने अभी तक अपने कानून मंत्री की फर्जी डिग्री मामले में जांच के आदेश क्यों नहीं दिए यह एक बड़ा प्रश्न है।
जिस जितेंद्र सिंह तोमर के बारे में अदालत ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले ही यह कह दिया था कि उनकी एलएलबी की डिग्री फर्जी है उस मामले में अब तक आप ने अपने आंतरिक लोकपाल से भी जांच नहीं कराई है ना ही कोई जांच बैठाई है।
पार्टी के नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने कई मुद्दे उठाए थे जिसमें से तोमर की फर्जी डिग्री मामले में आंतरिक लोकपाल से जांच का भी मामला था।
लेकिन न पार्टी ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है बल्कि ये सवाल उठाने वाले नेताओं को पार्टी से जरूर निकाल दिया है। अब प्रश्न तो ये उठता है कि क्या यही वो पार्टी है जो विपक्षियों को हर मामले पर कम से कम जांच की सलाह देती रहती है।
अवध विवि से शुरू हुआ फर्जीवाड़ा, बीएससी की डिग्री भी फर्जी
दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की एलएलबी ही नहीं बीएससी की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। फर्जी डिग्री लेने का खेल सबसे पहले यहां साकेत महाविद्यालय से शुरू हुआ है।
जांच के बाद अवध विश्वविद्यालय ने जनवरी में ही बीएससी की डिग्री को फर्जी करार दे दिया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव-2015 के दौरान त्रिनगर विधानसभा सीट से आप पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उतरे जितेंद्र सिंह तोमर पुत्र बलबीर सिंह तोमर की स्नातक डिग्री फर्जी होने का आरोप लगा था।
यह डिग्री वर्ष 1988 में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध का.सु. साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या से जारी बताई गई थी।
चुनाव से पहले सामने आ गया था कानून मंत्री का फर्जीवाड़ा
बता दें कि दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के फर्जी डिग्री का मामला उनके कानून मंत्री मनोनीत होने से पहले ही सामने आ गया था। बल्कि ये मामला तो दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही सामने आ गया था।
जब 4 फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनसे उनकी फर्जी डिग्रियों के आधार पर उनके वकील होने के दावे के बारे में जवाब-तलब किया था। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को भी इस संबंध में नोटिस जारी किया था।
इसके बावजूद भ्रष्टाचार मुक्त और सच्ची पार्टी होने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने उन्हें अपना कानून मंत्री बना लिया।
शिकायतकर्ता है गायब
गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील क्षेत्र के रावली कलां निवासी प्रदीप पुत्र वेदप्रकाश ने डिग्री की जांच के लिए अवध विवि प्रशासन को पत्र लिखा। कुलपति के निर्देश पर परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी ने गोपनीय विभाग से जनवरी में जांच कराई थी।
जांच में जितेंद्र सिंह तोमर की बीएससी द्वितीय वर्ष, अनुक्रमांक-31331, वर्ष 1988 की उपाधि, अंकपत्र व अनुक्रमांक को पूर्णतया फर्जी पाया गया था। परीक्षा नियंत्रक ने 22 जनवरी के पत्रांक पर शिकायतकर्ता को पत्र भेज अवगत कराया था।
इस पर डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि फैजाबाद के परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी ने कहा कि शिकायत पर गोपनीय विभाग की सारणीयन पंजिका से जांच कराई गई थी तो जितेंद्र सिंह तोमर की उपाधि, अंकपत्र व अनुक्रमांक फर्जी पाया था। जांच रिपोर्ट भी शिकायतकर्ता को भेज दी गई थी। डिग्री साकेत महाविद्यालय से जारी हुई थी।
वहीं, आम आदमी पार्टी के जोनल प्रवक्ता सभाजीत सिंह ने कहा कि जिस शिकायतकर्ता के पत्र पर डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की शिकायत करने वाला अभी तक गायब है। उस समय गाजियाबाद में उसे खूब खोजा गया, मगर शिकायतकर्ता नहीं मिला।
बता दें कि हाईकोर्ट ने इस मामले की निगरानी इसलिए शुरू कर दी है क्योंकि कुछ दिनों पहले शिकायतकर्ता ने तोमर के खिलाफ डाली गई याचिका को वापस लेना चाहा और जब कोर्ट ने मना कर दिया तो पिछली दो सुनवाईयों से वो कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा।