पुलिस की नाक के नीचे सट्टा चलाने और खुले आम शराब बिकवाने के आरोप में नंद
नगरी थाने के 49 पुलिस कर्मियों का तबादला तीसरी बटालियन में कर दिया गया
है।
क्षेत्र के एक युवक ने पुलिस से परेशान होने के बाद मामले की शिकायत
राष्ट्रपति, एलजी समेत पुलिस के आलाधिकारियों से की थी। विजिलेंस जांच में
आरोपों को सही पाया गया।
पुलिस हेड क्वार्टर (पीएचक्यू) के आदेश पर सभी का
तबादला कर दिया गया। इतनी बड़ी संख्या में तबादला होने से विभाग में हर जहां देखो ये खबर चर्चा में है।
शिकायतकर्ता को फंसाया गया था झूठे मामले में
सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ता ललित सिंह अपने परिवार के साथ नंद नगरी
इलाके में रहता है और इसी क्षेत्र में उसकी फोटो स्टेट की दुकान हैं। यहां
वह अपने पिता हिम्मत सिंह के साथ बैठता है।
थाने में शिकायत लेकर आने वाले
लोग, जिन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता, उसकी दुकान पर शिकायत लिखवाकर ले जाते
थे। ललित का आरोप है कि यह बात जब थाने के पुलिसकर्मियों को पता चली तो
उन्होंने उसे और उसके पिता को धमकाना शुरू कर दिया।
28 दिसंबर 2013 को एक
झूठे मामले में फंसाकर उसके बुजुर्ग पिता को तिहाड़ जेल भेज दिया। दस
दिन हिम्मत को जेल में बिताने पडे़। इसके बाद भी उसके परिवार को लगातार
परेशान किया जाने लगा। ललित का आरोप था कि इलाके में खुलेआम शराब बिक रही
थी, सट्टे के कारोबार चल रहे थे।
इसलिए हुआ तबादला
ललित का आरोप था कि इलाके में खुलेआम शराब बिक रही थी, सट्टे के कारोबार चल रहे थे। उसने इसके सबूत जुटाए और राष्ट्रपति, एलजी समेत पुलिस के आलाधिकारियों से शिकायत की। विजिलेंस द्वारा पुलिस आयुक्त को सौंपीं गई रिपोर्ट में ललित की शिकायतों की पुष्टि की गई है।
इसमें सिपाही से लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी तक को जिम्मेदार बताया गया। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक सजा के तौर पर नंद नगरी थाने से सिपाही से इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी तक 49 कार्मिकों का तबादला तीसरी बटालियन में कर दिया गया।
पूर्वी रेंज के संयुक्त आयुक्त संजय बेनीवाल ने इन तबादलों को रूटीन प्रक्रिया बताया। वहीं एक साथ 49 कर्मियों के तबादलों के बाद पूरे उत्तर-पूर्वी जिले में हड़कंप मचा हुआ है।