रोशनआरा बाग परिसर में झील से सिल्ट निकालकर और जंगली घासफूस को समाप्त कर इसे पुनर्विकास करने के कार्य का उपराज्यपाल ने शुभारंभ किया। उन्होंने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस झील का पुराना गौरवशाली स्वरूप फिर से बहाल किया जाए।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को दिल्ली नगर निगम के अधीन आने वाले 400 साल पुराने एतिहासिक रोशनआरा बाग का दौरा किया। उन्होंने एमसीडी को निर्देश दिया कि तीन माह के भीतर यहां चिह्नित 8.5 एकड़ जमीन पर दुर्लभ प्रजाति के पौधों और फूलों की विश्वस्तरीय नर्सरी विकसित की जाए।
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उन्होंने यहां पर जमा मलबा और सी एंड डी वेस्ट को तुरंत हटाकर काम शुरू करने का निर्देश दिया। उपराज्यपाल ने कहा कि इस नर्सरी से शहर भर में पौधरोपण के लिए न केवल सालाना तीन लाख पौधे उपलब्ध होंगे बल्कि दिल्ली के आम लोगों को कम दाम में ऐसे पौधे उपलब्ध हो सकेंगे।
रोशनआरा बाग परिसर में झील से सिल्ट निकालकर और जंगली घासफूस को समाप्त कर इसे पुनर्विकास करने के कार्य का उपराज्यपाल ने शुभारंभ किया। उन्होंने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस झील का पुराना गौरवशाली स्वरूप फिर से बहाल किया जाए। ताकि युवा पीढ़ी इससे रूबरू हो सके।
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लोदी गार्डन और नेहरू पार्क जैसा होगा स्वरूप
उपराज्यपाल ने 57 एकड़ भूमि में फैले रोशनआरा बाग को पारिस्थितिकी और प्रकृति उद्यान के रूप में समृद्ध और पुनर्विकसित करने का निर्देश दिया, ताकि इसका प्रारूप लोदी गार्डन या नेहरू पार्क जैसा हो सके। वहीं, अक्तूबर तक काम पूरा करने का निर्देश दिया है। एलजी ने कहा कि सब्जीमंडी, घंटाघर, शक्ति नगर, कमला नगर और मल्कागंज के बीच उपेक्षित रोशनआरा बाग एक महत्वपूर्ण व समृद्ध विरासत है। यहां पैदल आने के लिए मार्ग बनाए जाएं।