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कोरोना से ठीक हुए मरीज के दिमाग में बने खून के 400 थक्के

Wed, 30 Dec 2020 08:24 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अस्पताल में डॉक्टर के साथ मिथिलेश - फोटो : amar ujala
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कोरोना संक्रमण से उबरने वाला एक मरीज के इंसेफेलाइटिस बीमारी से पीड़ित होने का मामला सामने आया है। रोगी को कुछ दिन पहले दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हो गया है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 के कारण इंसेफेलाइटिस के बहुत कम मामले देखे गए हैं, दुनिया भर में ऐसे बहुत कम मामले दर्ज किए गए हैं। यह एक न्यूरो विकार है जो वायरस के कारण होता है। यह प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर दिमाग में सूजन पैदा करता है।

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अपोलो के डॉक्टर राजेश चावला ने बताया कि  जम्मू के रहने वाले मिथिलेश लम्ब्रू में कोरोना संक्रमण के बाद एनसेफेलाइटिस बीमारी का पता चला है। उनके दिमाग में बेहद छोटे आकार के खून के 400 थक्के भी मिले। अस्पताल पहुंचने पर मरीज की हालत काफी गंभीर थी। उनके फेफड़े खराब हो गए थे। अस्पताल आने पर उन्हें  वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा। 

उन्होंने बताया कि मिथिलेश लम्ब्रू को हल्के लक्षणों वाला कोरोना संक्रमण हुआ था, जिसके बाद वे घर में ही क्वारन्टीन हो गए। हालांकि उनकी हालत बिगड़ती गई और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उन्हें तुरन्त जम्मू के एक अस्पताल में भर्ती किया गया। उनके फेफड़ों में निमोनिया हो गया था। वहां के डॉक्टर उनके इलाज का सही तरीका तय नहीं कर पा रहे थे, इसलिए स्थानीय डॉक्टरों की टीम ने अस्पताल के डॉक्टरों को फोन किया। इसके बाद अपोलो की टीम मरीज को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले आई। दिल्ली आने के बाद दो दिन के अंदर ही कोविड निमोनिया के लक्षण ठीक होने लगे और उन्हें वेंटीलेटर से हटा लिया गया है।
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दिमाग में खून के 400 छोटे थक्के मिले
अपोलो के न्यूरो विभाग के डॉक्टर विनीत सूरी ने बताया कि वेंटिलेटर हटाने के कुछ समय बाद मरीज होश में आ जाता है,लेकिन मिथिलेश को काफी समय बाद भी होश नहीं आया। उनकी एमआरआई करने पर पता चला कि उनके दिमाग में 400 से ज्यादा छोटे ब्लड क्लॉट हो गए थे। डॉक्टरों ने ने थेरेपी और स्टेरॉयड दिए, जिससे मरीज की हालत में सुधार होने लगा और 7 दिनों के अंदर मरीज पूरी तरह से होश में आ गया। हालांकि उनके हाथ-पैर में अभी भी कमजोरी है।  

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