गाजियाबाद में 22 लाख कप सीरप का स्टॉक गायब हो गया है। नशे के लिए खांसी की दवा प्रयोग होने की शिकायतें तो आती रहती थीं, लेकिन विदेशों को बड़ी मात्रा में तस्करी का मामला पहली बार सामने आया है।
इसके पीछे लगे माफिया अब दोबारा तस्करी कराने की कोशिश करेंगे। माफिया के हाथों तक खांसी की दवा का भंडार पहुंचाने वालों की तलाश में अफसरों ने दिन-रात एक कर दिया है। प्रारंभिक जांच में करीब एक लाख बोतलों की तस्करी होने का मामला सामने आया था।
सूबे में शुरू हुई जांच फिलहाल एनसीआर के जनपदों पर केंद्रित है। गाजियाबाद में ही तीन माह में 22 लाख बोतलों की बिक्री दिखाई गई है, जिसका फिलहाल रिकार्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
गाजियाबाद की ही तरह मेरठ, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर में भी स्टाक का रिकार्ड कंप्लीट नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब डेढ़ लाख बोतलों का रिकार्ड फिलहाल गायब है।
इसको जुटाने के लिए मेडिकल स्टोर संचालकों के यहां छापामारी शुरू की गई है। जिला औषधि निरीक्षक दीपक शर्मा ने बताया कि अब नारकोटिक्स टीमें अपने स्तर से जांच करेंगी। ड्रग डिपार्टमेंट की टीमें अपनी जांच अलग से करेंगी।
नारकोटिक्स अफसरों को जहां जरूरत होगी, वहीं पर ड्रग अफसरों को बुलाया जाएगा। जांच लगातार चलेगी। अगले तीन दिन मेडिकल स्टोरों को चिह्नित कर छापामारी की जाएगी। जिला प्रशासन ने जांच के दौरान पुलिस को साथ रहने के आदेश कर दिए हैं।