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EXCLUSIVE: यहां 6 महीने में 208 बेटियां बनीं हवस का शिकार

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औद्योगिक शहर में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां हर रोज कोई न कोई विवाहिता, महिला, किशोरी यहां तक कि अबोध बच्चियां यौन हिंसा का शिकार हो रही हैं।
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इनका शारीरिक शोषण गैरों ने ही नहीं अपनों ने भी किया। इनमें से कई महिला और बच्चियां मानसिक बीमारियों और हीनभावना से ग्रस्त होकर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

पुलिस आयुक्त कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जून माह तक शहर में यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म, छेड़छाड़, दहेज हत्या, बहला फुसला कर भगा ले जाने की 254 घटनाएं दर्ज की गईं।
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इनमें यौन उत्पीड़न की 18 घटनाएं तो बच्चियों के साथ घटीं। यानि हर 17वेें घंटे एक महिला यौन उत्पीड़न का शिकार हुई और हर दसवें दिन एक बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। पिछले छह में शहर में दुष्कर्म की 56 घटनाएं हुईं।

64 महिलाओं, युवतियों को यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, अश्लील हरकतों का शिकार बनाया गया। 88 युवतियां, किशोरियों को बहला-फुसला कर भगा ले जाया गया जबकि 16 किशोरी/युवतियां अपहरण का शिकार हुईं।

अपने ही थे शर्मसार करने वाले

यौन उत्पीड़न की घटनाएं महिलाओं के साथ कार्यालय में, मॉल के शौचालय में, घर के अंदर, कार में जबरन खींचने के बाद और सार्वजनिक जगहों पर हुईं।

इन घटनाओं को इक्का दुक्का में किसी अपरिचित को छोड़कर बाकी उनके सहकर्मियों, दोस्त या परिचित ने अंजाम दिया। 18 बच्चियां दुष्कर्म का शिकार बनीं। एक बच्ची को तो उसके सगे मामा और दूसरी बच्ची को पिता ने ही हवस का शिकार बना डाला।

-महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भले ही थम नहीं रही हों, पुलिस आरोपियों को पकड़ने में पीछे नहीं है। पुलिस ने दुष्कर्म के 56 मामलों में सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 18 घटनाओं में 17 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इसी तरह छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने वालों में इक्का दुक्का को छोड़कर पुलिस सबके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर चुकी है।

पिता और मामा जैसे रिश्ते भी हुए कलंकित

केस एक: दिनांक 29 जून 2015: नंगला एंक्लेव निवासी विश्वजीत अस्पताल में भर्ती अपने दोस्त की चार साल की बेटी को बहाने से अपने घर ले गया। वहां बच्ची के साथ कुकर्म कर फरार हो गया।

केस दो: दिनांक 2 जून 2015: सेक्टर 55 थाना क्षेत्र में रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी ने पुलिस को बताया कि उसका सगा मामा पिछले कई महीनाें से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। किसी को बताने पर सबको मार देने की धमकी देता है।

केस तीन: दिनांक 14 फरवरी 2015: सेक्टर सात थाना क्षेत्र में रहने वाले एक महिला को बिजली विभाग की विजिलेंस टीम में तैनात सब इंस्पेक्टर ने बच्चाें को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

केस चार: दिनांक 05 जून 2015 पति से अलग होकर शहर बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र में रह रही महिला को सहारा देने के नाम पर सुभाष नामक युवक ने बनाया हवस का शिकार।
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ज्यादातर मामले प्रवासियों के

पुलिस आंकड़ों के मुताबिक यौन उत्पीड़न के अधिकतर मामले शहर में बाहर से आने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए। बच्चियों से दुष्कर्म के लगभग सभी मामलों में दुष्कर्म पीड़िता और दुष्कर्म करने वाला दोनों ही दूसरे प्रदेश से यहां आकर बसे थे।

छेड़छाड़ के मामलों को छोड़ दिया जाए तो बहला-फुसला कर भगा ले जाने वाले और अपहरण के मामले भी दूसरे प्रदेशों के रहने वालों के बीच ही हुए।

अपराध आंकड़ों में (30 जून 15 तक)
जुर्म-------------------------एनआईटी---------जोन सेंट्रल-------बल्लभगढ़
दुष्कर्म-----------------------27---------------14-------------------15
छेड़छाड़----------------------30---------------20-------------------14
बहला कर भगाना-----------44----------------21-------------------28
बच्चियों से दुष्कर्म----------08----------------05-------------------06    
कुकर्म-----------------------04----------------01-------------------01
अपहरण---------------------07----------------05------------------04
कुल-------------------------120---------------66------------------68

दूसरे प्रदेश से आकर यहां रहने वालों में अस्थायित्व का भाव रहता है इसलिए उनमें समाज का भय कम रहता है। समाज मेें पहचान नहीं होने की मानसिकता के चलते वह अपराध करने में नहीं हिचकते। -प्रो.कृष्णा शौरन, समाजशास्त्री, महिला गवर्नमेंट कॉलेज

-महिला संबंधी अपराधों में बिलकुल ढील नहीं दी जाती है, जितने भी केस दर्ज हुए उनमें आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई। इन मामलों में जांच भी तेजी से करवाई जाती है। यौन उत्पीड़न के केस में कोशिश रहती है कि छह माह से एक साल के भीतर आरोपी को सजा करवा दी जाए। -सुभाष यादव पुलिस आयुक्त फरीदाबाद
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