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सर्वोदय रसोई से मिल रही रोजाना 2000 लोगों को मदद 

Sat, 09 May 2020 10:38 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी जैनेंद्र ज्योति, नई दिल्ली

सार

- दिहाड़ी मजदूरों को भूखे देख आया किचन खोलने का ख्याल
- राशन कार्ड बनवाने में सहायता करने के अलावा राशन भी मुहैया करा रहे समाजसेवी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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लॉकडाउन में सब काम बंद है। ऐसे में खासकर रोजाना कमाने खाने वालों के सामने अपना और परिवार का पेट पालने का गहरा संकट आ गया है। इनकी दिक्कत को दूर करने के लए बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। इसमें ऐसे लोग भी हैं जो बिना किसी सरकारी या अन्य मदद के जरूरतमंदों की सहायता में लगे हैं। वह चाहे सरकार से राशन दिलवाने के लिए कार्ड बनवाने की बात हो या कच्ची खाद्य सामग्री अथवा पका-पकाया भोजन मुहैया कराने की, ककरौला में बेसहारों की मदद के लिए बिष्णु पाठक और प्रवीण झा मसीहा बनकर उभरे हैं।

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बिहार के बेगूसराय और समस्तीपुर जिले के मूल निवासी बिष्णु पाठक और प्रवीण झा सर्वोदय रसोई के माध्यम से दिल्ली के 5 इलाकों में रोजाना 2000 लोगों को एक समय का खाना उपलब्ध करा रहे हैं। समाजसेवी एवं मैथिली फिल्म निर्माता बिष्णु पाठक बताते हैं कि कई दिहाड़ी मजदूरों के एक समय के खाने पर आफत आने की सूचना लॉकडाउन के तीसरे दिन से ही मिलने लगी थी। ऐसे में व्यवसायी प्रवीण झा की सलाह पर जरूरतमंदों की मदद के लिए ठानी।

ऐसे में इसकी औपचारिक शुरुआत लोगों को सरकार से मदद दिलवाने के लिए राशन कार्ड बनवाने में सहायता कर की। उस दौरान करीब 1000 लोगों का राशन कार्ड बनवाने में अपने सहयोगियों की सहायता ली। लेकिन इसके बाद कई ऐसे लोग भी सामने आए जिनके पास दिल्ली का आधार कार्ड नहीं होने के कारण उनका कार्ड नहीं बन सका। ऐसे लोगों की मदद के लिए कुछ करने का जुनून सवार हुआ और अगले ही दिन 29 मार्च से ककरौला में सर्वोदय रसोई खोल लिया।
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बिष्णु पाठक के मुताबिक सर्वोदय रसोई में तैयार खाना दिहाड़ी मजदूरों की ज्यादा संख्या वाले इलाकों भरत विहार के डी ब्लॉक, ई-ब्लॉक, राजू इन्कलेव और द्वारका सेक्टर- 16 में बांटा जा रहा है। लोगों को रोजाना एक जैसा खाना मिलने पर बेस्वाद न लगे इसके लिए हर दिन चावल के साथ दाल, आलू-सोयाबीन की सब्जी या कढ़ी और पूरी-सब्जी देते हैं। खाना बांटने के दौरान सामाजिक दूरी का भी विशेष ख्याल रखा जाता है ताकि कोरोना से बचाव हो सके। इसके अलावा भीड़ न लगे इसके लिए हर व्यक्ति से पूछा जाता है कि उसे कितने लोगों का खाना चाहिए और उसी हिसाब से अगले दिन जरूरतमंदों की संख्या निर्धारित कर खाना बनाया जाता है। सर्वोदय रसोई की मदद से अब तक लगभग 70,000 लोगों को एक समय का खाना मुहैया कराया जा चुका है।
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