लॉकडाउन के दौरान सरकारी और निजी दफ्तर खोले जाने के बाद अब राजधानी में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को शुरू करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। इसमें दलील दी गई कि काफी लोगों के पास निजी वाहन नहीं हैं, जो सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं। इसलिए सार्वजनिक परिवहन को शुरू करने के निर्देश दिए जाएं।
यह याचिका लॉ स्टूडेंट सुरेश चड्ढा ने वकील प्रशांत वक्षिष के माध्यम से दायर की है। इसमें कहा कि सरकार ने दफ्तर खोलने की अनुमति तो दे दी, लेकिन दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के आवागमन के बारे में नहीं सोचा गया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में लोगों को दफ्तरों तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है।
इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के पालन की शर्तों के साथ सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को शुरू किया जाना चाहिए। याचिका में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के हवाले से कहा गया कि दिल्ली में 25 लाख लोग रोजाना डीटीसी बसों में और दिल्ली मेट्रो में 15 लाख लोग प्रतिदिन सफर करते हैं। अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी काफी लोग निर्भर हैं।