सबसे सुरक्षित और अक्सर हाई अलर्ट पर रहने वाले तिहाड़ जेल की सुरक्षा को कैदियों ने तार-तार कर दिया। दिन के उजाले में कैदियों ने जेल की दीवार में सुरंग बनाकर भागने का इंतजाम कर लिया।
हालांकि, उनके मंसूबों पर पानी फिर गया। घटना के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने उच्च स्तरीय बैठक बुला कर पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। बताया गया कि उन दोनों में से जो ज्यादा खतरनाक कैदी था वो भागने में कामयाब हो गया जबकि दूसरे को पुलिस ने पकड़ लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 10 से 12 के बीच जेल संख्या 8/9 की दीवार में कैदियों ने करीब डेढ़-डेढ़ फुट के दो बड़े सुरंग कर दिए।
दो घंटे तक करते रहे सुराख किसी को नहीं हुई खबर
तिहाड़ के इतिहास में जेल से भागने की यह तीसरी घटना है जबकि सुरंग खोदकर भागने की यह पहली घटना है। इससे पहले दुनिया के सबसे बड़े ठग चार्ल्स शोभराज और फूलन देवी के हत्यारे शेर सिंह राणा ने भी यहां से भाग चुके हैं।
बता दें कि इस बार ये दो कैदी दो घंटे तक वे दीवार में सुराख करते रहे और सुरक्षाकर्मियों को भनक तक नहीं लगी। कैदियों को जेल की दीवार से बाहर ही निकलना था कि अचानक वहां किसी के आने की आहट से घबराकर उनमें से एक तो छिप गया जबकि दूसरा भाग गया।
जब तक पहला कैदी दुबारा उस जगह पर पहुंचता तब तक सुरक्षाकर्मियों की नजर उस जगह पर पड़ गई। दीवार में जिस जगह पर सुराख बनाई गई है, उस जगह से कैदी तिहाड़ मुख्यालय के पीछे बने सेमी ओपन जेल की ओर निकलते।
सेमी ओपन जेल के कैदियों ने की मदद!
गौरतलब है कि सेमी ओपन से जेल हेडक्वाटर होते हुए बाहर निकलना आसान था। आशंका जताई जा रही है कि दीवार में सुराख बनाने के लिए जिस औजार का इस्तेमाल किया गया है, उसे सेमी ओपन जेल के कैदियों ने ही उपलब्ध कराया हो। सेमी ओपन जेल के कैदी वहां कृषि कार्य में जुटे हैं और उनके पास औजार होते हैं।
इसके अलावा जहां पर ये दीवार है, वहां झाड़ी और बड़ी-बड़ी घास है। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों की नजर वहां तक नहीं पहुंच पाती। हालांकि, वहां पर खड़े एक-दो कैदियों पर सुरक्षाकर्मी की नजर पड़ी, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
घटना के सामने आने के बाद जेल मुख्यालय में जेल महानिदेशक आलोक वर्मा की अगुवाई में एक बैठक हुई। बैठक में सभी पहलुओं पर चर्चा की गई।
जेल के डीजी ने साध रखी है चुप्पी
इस केस के पूरे जांच का जिम्मा जेल संख्या तीन के सुप्रीटेंडेंट मनोज द्विवेदी को सौंपा गया है। उस जेल के कई कैदियों से पूछताछ की गई है।
लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। इस जेल में 300 सजायाफ्ता एवं 1000 विचाराधीन कैदी बंद हैं। उधर, घटना के बाद तिहाड़ जेल के डीआईजी सहित प्रवक्ता ने अपना फोन बंद कर लिया है। जेल महानिदेशक आलोक वर्मा ने भी मामले पर चुप्पी साध रखी है।
दिल्ली पुलिस भागे हुए कैदी की सोमवार को तस्वीर जारी करेगी ताकि जनता से भी उन्हें पकड़ने में मदद मांगी जा सके। भागने की कोशिश करने वाले दोनों कैदी सब-जेल 7 में रखे गए थे जिनकी उम्र 18-21 साल के बीच है।
ऐसे भागा था चार्ल्स शोभराज
बता दें कि चार्ल्स शोमभराज ने जब पहली बार तिहाड़ से 1986 में भागने की कोशिश की थी और वो कामयाब भी हो गए थे।
उन्होंने इसके लिए मिठाई में नींद की दवा मिलाकर सबको खिला दी थी। उन्होंने 820 लेप्रोस नामक नींद की गोली का इस्तेमाल किया था ताकि सारे गार्ड्स सो जाएं।
वहीं 2004 शेरसिंह राणा का सहयोगी पुलिस के वेश में उसे ट्रायल हियरिंग के लिए ले जाने आया था। असली पुलिस मौके पर पहुंचती उससे चंद मिनट पहले उसका साथी उसे भगा ले गया।