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दिल्ली में रोजाना चोरी होते हैं 130 वाहन, नेपाल तक फैला है काला कारोबार

Fri, 08 Nov 2019 03:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा शुजात आलम, नई दिल्ली
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vehicle theft
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दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे राजधानी में हर घंटे औसतन छह वाहन चोरी हो जाते हैं। कमाल की बात यह है कि चोर मॉडल और कलर के हिसाब से लग्जरी वाहनों के अलावा बुलेट और स्पोर्ट्स बाइक तक चोरी कर रहे हैं। दूसरे राज्यों में बैठे लोग वाहन चोरों को बस कार का कलर और मॉडल बताते हैं। 

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चोर उस मॉडल की कार की रैकी कर उसे उड़ा ले जाते हैं। इन वाहनों को बड़े ही आराम से उत्तर पूर्वी राज्यों के अलावा नेपाल तक भेज देते हैं। मजे की बात यह है कि वाहन चोरी के आंकड़े बजाए घटने के दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। 

पिछले साल एक जनवरी से 31 अक्तूबर के बीच की समय अवधि में वाहन चोरी का आंकड़ा हर घंटे में पांच वाहन चोरी करने का था, जो अब बढ़कर छह हो गया है। दिल्ली पुलिस ने मामलों में अब तक पिछले दस माह के दौरान 5212 लोगों को गिरफ्तार कर कई बड़े वाहन चोरों के गैंग का पर्दाफाश किया है।
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दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 में एक जनवरी से 31 अक्तूबर के बीच अब तक 39065 वाहन चोरी हो चुके हैं। इसका अगर औसत निकाला जाए तो रोजाना करीब 130 से अधिक वाहन चोरी हो जाते हैं। इस अवधि के दौरान वर्ष 2018 में औसतन 38694 वाहन चोरी हुए थे। इस आंकड़े के अनुसार रोजाना औसतन करीब 128 से अधिक वाहन रोजाना चोरी हो रहे थे। वहीं यदि हम 2017 के आंकड़ो की बात करे तो पूरे साल में (एक जनवरी से 31 दिसंबर के बीच) कुल 40972 वाहन चोरी हुए थे। इसका हर दिन का औसत देखें तो वह 113 वाहन रोजाना चोरी का था। 

आंकड़ों पर गौर करें तो वाहन चोरी की घटनाओं पर बजाए लगाम लगने के वह बढ़ती ही जा रही है। वहीं मामले पर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर इलाके के लोग बड़ी संख्या में दिल्ली आकर अपने वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं, जिससे दिल्ली में वाहन चोरी का आंकड़ा बढ़ जाता है।

चोरी के वाहनों का क्या होता है...
आपके दिल में यह सवाल जरूर उठता होगा कि राजधानी में यदि रोजाना 130 दोपहिया व कार चोरी होती है तो इनका क्या होता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वाहन चोरों का अरबों रुपये का कारोबार है। उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में इनका कारोबार फैला है। ज्यादातर मामलों में वाहन चोरी कर उन्हें डिस्मेंटल (पुर्जो में बाट दिया जाता दिया जाता है) कर दिया जाता है। वाहनों के पुर्जे पुराने सामान के बाजार में पहुंच जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में वाहनों के फर्जी कागजात तैयार कर उन्हें उत्तर पूर्वी राज्यों व नेपाल तक भेज दिया जाता है। ऐसे मामलों में चोरी के वाहनों की अच्छी कीमत मिल जाती है।

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रात दो से चार बजे के बीच होते हैं वाहन चोरी...

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब तक पकड़े गए ज्यादातर वाहन चोरों ने खुलासा किया है कि अक्सर वाहनों को रात दो से चार बजे के बीच चोरी किया जाता है। चोरों को लगता है कि इस समय अवधि में सड़कों पर पुलिस न के बराबर होती है।

इसके अलावा लोग भी उस समय गहरी नींद में होते हैं। वाहन चोरी कर उन्हें किसी सुरक्षित पार्किंग जैसे मेट्रो या अन्य पार्किंग में खड़ा कर दिया जाता है। इसके बाद मौका लगते ही उसे ठिकाने लगा दिया जाता है। अब तक मेवात, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादनगर, मुरादाबाद, संभल आदि जगहों पर चोरी के वाहनों को डिस्मेंटल किए जाने का पता चला है। पुलिस अक्सर इन स्थानों पर छापा मारती रहती है।

इन उपायों से चोरी की आंशका को किया जा सकता है कम...
. कोशिश करें कि अपने वाहनों को पार्किंग में ही खड़ा करें और उसमें सिक्योरिटी अलार्म जरूर लगवाएं।
. कार में गियर लॉक लगाकर कुछ हद तक चोरी की आशंका को कम किया जा सकता है।
. दोपहिया वाहन में व्हील लॉक जरूर लगवाएं, यदि रात को अपनी गली में वाहन खड़ा करते हैं तो उसमें लोहे की जंजीर व ताला लगा सकते हैं।
. कार के शीशों पर यदि नंबर लिखवा दिया जाए तो भी उसके बरामद होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
. कार में जीपीएस सिस्टम लगाकर चोरी हुई कार को बरामद करने में मदद मिल सकती है।

वाहन चोरी के पिछले सालों के कुछ आंकड़े :
साल            आंकड़े
2019            39065
2018            46433
2017            40972
2016            38644
2015            32729
2014            23384
2013            14916
(वर्ष 2019 के आंकड़े एक जनवरी से 31 अक्तूबर तक के ही हैं)
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