दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब तक पकड़े गए ज्यादातर वाहन चोरों ने खुलासा किया है कि अक्सर वाहनों को रात दो से चार बजे के बीच चोरी किया जाता है। चोरों को लगता है कि इस समय अवधि में सड़कों पर पुलिस न के बराबर होती है।
इसके अलावा लोग भी उस समय गहरी नींद में होते हैं। वाहन चोरी कर उन्हें किसी सुरक्षित पार्किंग जैसे मेट्रो या अन्य पार्किंग में खड़ा कर दिया जाता है। इसके बाद मौका लगते ही उसे ठिकाने लगा दिया जाता है। अब तक मेवात, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादनगर, मुरादाबाद, संभल आदि जगहों पर चोरी के वाहनों को डिस्मेंटल किए जाने का पता चला है। पुलिस अक्सर इन स्थानों पर छापा मारती रहती है।
इन उपायों से चोरी की आंशका को किया जा सकता है कम...
. कोशिश करें कि अपने वाहनों को पार्किंग में ही खड़ा करें और उसमें सिक्योरिटी अलार्म जरूर लगवाएं।
. कार में गियर लॉक लगाकर कुछ हद तक चोरी की आशंका को कम किया जा सकता है।
. दोपहिया वाहन में व्हील लॉक जरूर लगवाएं, यदि रात को अपनी गली में वाहन खड़ा करते हैं तो उसमें लोहे की जंजीर व ताला लगा सकते हैं।
. कार के शीशों पर यदि नंबर लिखवा दिया जाए तो भी उसके बरामद होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
. कार में जीपीएस सिस्टम लगाकर चोरी हुई कार को बरामद करने में मदद मिल सकती है।
वाहन चोरी के पिछले सालों के कुछ आंकड़े :
साल आंकड़े
2019 39065
2018 46433
2017 40972
2016 38644
2015 32729
2014 23384
2013 14916
(वर्ष 2019 के आंकड़े एक जनवरी से 31 अक्तूबर तक के ही हैं)