इराक की राजधानी बगदाद में रहने वाली 66 वर्षीय महिला भोजन या पेय के बाद पैरोटिड ग्रंथि के बार-बार होने वाले दर्द और सूजन से पीड़ित थी। डॉक्टरों से परामर्श के बाद उसे पता चला कि उसके दाएं तरफ पैरोटिड नली में कई पत्थर हैं और सबसे बड़ा पत्थर लगभग 8 मि.मी. आकार का है, जो नली के बीच में अटका हुआ है।
अपने देश और आसपास के अधिकांश डॉक्टरों ने पेरोटिड ग्रंथि को हटाने की एक प्रक्रिया का सुझाव दिया जो चेहरे पर एक भद्दा निशान छोड़ देता और उसके चेहरे को लकवाग्रस्त कर देता । वह सियालेंडोस्कोपी नामक एक प्रक्रिया के बारे में सुनकर भारत आई थी जहां सिर्फ 1.3 मि.मी. माप वाला एक छोटा एंडोस्कोप पैरोटिड ग्रंथि में डाला जाता है और रुकावट का कारण पता किया जाता है।
सर गंगा राम अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया की शुरुआत हुई, जहां पैरोटिड नली की एंडोस्कोपी से पता चला और देखा गया कि सीटी स्कैन में बड़ा पत्थर वास्तव में छोटे पत्थरों का एक समूह है जो एक साथ फसा हुआ था। सितम्बर 2019 के आखिरी हफ्ते में इस महिला का ऑपरेशन किया गया।
डॉ. वरुण राय के नेतृत्व में इस ऑपरेशन को सफल बनाने वाले डॉक्टरों ने कहा कि पैरोटिड ग्रंथि में इतनी बड़ी संख्या में पथरी होना काफी दुर्लभ मामला है। पैरोटिड ग्रंथि में पत्थरों की घटना सामान्य आबादी के 0.02% से कम है और कई पत्थर होना और भी दुर्लभ हैं। मरीज अब बिना दर्द के अपनी पसंद का खाना खा सकती है। रोगी और उसके परिजन ने जब उसकी ग्रंथि से निकाले गए पत्थरों की बड़ी संख्या को दिखाया तो टिप्पणी की कि "इतने सारे पत्थर, मैं अब एक घर बना सकती हूं।"