आरोपी ने कहा कि वह बेटे को बेंगलुरू ले जाए। वहां उसे उसका भाई रिंकू मिलेगा। पीडित ने रिंकू को दो लाख रुपये दे दिए। रिंकू ने दाखिला प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। प्रीतम सिंह को बाद में कॉलेज से पता लगा कि उसके बेटे का कॉलेज में कोई दाखिला नहीं हुआ है। इंस्पेक्टर मनोज कुमार मिश्रा की देखरेख में एसआई प्रमोद कुमार, एसआई राकेश मलिक और एएसआई संजय कुमार की टीम आरोपी की तलाश कर रही थी।
अपराध शाखा के विशेष पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि एसआई प्रमोद कुमार को सूचना मिली कि जालसाज लकी सिद्धू रानी बाग, दिल्ली में है। एसआई प्रमोद कुमार व एसआई राकेश मलिक की टीम ने लकी सिद्धू को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी दो वर्ष से फरार था। 10वीं पास लकी शुरू में प्रॉपर्टी डीलर था। वर्ष 2016 में इसने समर्थ एजुकेशन नाम से कंसल्टेंसी फर्म खोली।
आरोपी ऐसे करता था ठगी
आरोपी लकी ने पूछताछ में बताया कि वह नीट पास करने वाले छात्रों की जानकारी जुटा लेता था। इसके बाद वह छात्रों को फोन करता था और उन्हें विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व पीजी पाठ्यक्रम में दाखिला दिलाने का झांसा देता था। कई बार ये छात्रों से एडवांस में पैसा लेने में सफल हो जाता था। पैसा लेने के बाद ये गायब हो जाता था। पुलिस ने इसकी गिरफ्तारी से जालसाजी का अपराध शाखा, डाबडी और लुधियाना, पंजाब में दर्ज तीन मामलों को सुलझाने का दावा किया है।