दिल्ली में वीआईपी नंबरों के दूसरे राउंड की ऑनलाइन बोली लगाने की प्रक्रिया मंगलवार को खत्म हो गई। तीन कार्य दिवस तक चली इस बोली में सबसे ज्यादा मांग 0007 की रही। तीन लाख रुपये के इस नंबर को महागुन रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड ने 7.50 लाख रुपये देकर हासिल किया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बार पांच लाख के 0001 का क्रेज बोली लगाने वालों में नहीं दिखा। यही वजह है कि वह महज 5.30 लाख में बिक गया। दूसरे राउंड में कुल 80 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। ऑनलाइन बोली 14 नवंबर से शुरू हुई थी।
इस बार 27 नंबरों की नीलामी हुई है, जिससे परिवहन विभाग को कुल 66.30 लाख का राजस्व मिला। यह राजस्व पहले चक्र की तुलना में कम रहा। इस बार सबसे ज्यादा प्राइस 0007 को मिला, इसे पाने के लिए खरीददार ने न्यूनतम मूल्य तीन लाख से 4.50 लाख रुपये अधिक दिए, मगर पहली बार 12.50 लाख रुपये में बिका 0001 को खरीददारों ने इस बार तवज्जो नहीं दिया।
इसके लिए महज तीस हजार रुपये ही चुकाने पड़े। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सभी बोली दाताओं को बोली की रकम को 10 दिनों के भीतर कार्यालय में जमा कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनका पहले से जमा न्यूनतम मूल्य जब्त कर लिया जाएगा। नंबर को अलॉट करने के बाद उसे 90 दिनों के भीतर रजिस्टर्ड कराना होगा।
न्यूनतम मूल्य पर ही मिला पसंदीदा नंबर
सात लोग ऐसे भी रहे जिन्हें अपना पसंदीदा नंबर बिना बोली लगाए ही मिल गया, वह भी पहले से तय न्यूनतम मूल्य पर। इसके अलावा उन्हें एक रुपया भी अतिरिक्त नहीं चुकाना पड़ा।
न्यूनतम मूल्य एक लाख रुपये वाले नंबर 1313, 0700, 2000, दो लाख वाले 0048, 9999, और तीन लाख वाले 0008 और 0003 ऐसे नंबर थे जो अपने न्यूनतम मूल्य पर ही खरीददारों को मिल गए।