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भाईचारा और समरसता के लिए आगे आएं युवा : राज्यपाल

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युवाओं को भाईचारा, दया, समरसता एवं विश्व कल्याण का संदेश पूरे दुनिया में फैलाने के लिए आगे आना चाहिए। युवाओं में मानवता, करुणा और विश्व कल्याण की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। राज्य के युवाओं को पलायन करने के बजाए अपने ही क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने को लेकर आगे आना होगा तभी रिवर्स पलायन के सपने का साकार किया जा सकेगा।
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उक्त बातें राष्ट्रीय युवा दिवस पर दून विश्वविद्यालय में आयोजित कुलाधिपति एवं राज्यपाल ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने कहीं। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अपने अब तक के जीवनकाल में स्वामी विवेकानंद से जुड़ी 14 किताबों का अध्ययन किया और पाया कि 39 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अकल्पनीय कार्य किए और भारतीय लोगों को जागृत करने का कार्य किया। स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व सम्मोहन पैदा करने वाला है। विश्व धर्म सभा में दिया गया स्वामी विवेकानंद का उद्बोधन पश्चिमी जगत को भारतीय ज्ञान से परिचय कराने का सशक्त पहल थी। भारत युवा देश है जिसके कारण से भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। केंद्र सरकार के वीर बाल दिवस की घोषणा निश्चित ही युवाओं में प्रेरणा पैदा करेगी। राज्यपाल ने पलायन रोकने में उत्तराखंड के स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म उद्योगों की पहल की सराहना की।
दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने हिंदुस्तान के लोगों के भीतर भारतीयता एवं राष्ट्रीयता को विकसित करने की आधारशिला रखी थी। विश्व धर्म संसद (शिकागो) में स्वामी विवेकानंद ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को जो मंत्र दिया था। उसी मंत्र में शांतिपूर्म दुनिया की परिकल्पना निहित है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. एचसी पुरोहित ने किया। कार्यक्रम में विश्वश्ववद्यालय के कुलसचिव डॉ. एमएस मंदरवाल, ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. ओपीएस नेगी, देव सुमन विवि के वाइस चांसलर प्रो. पीपी ध्यानी, प्रो. हर्ष पति डोभाल, डॉ. सविता तिवारी कर्नाटक, उप कुलसचिव नरेंद्र लाल, डॉ. सुधांशु जोशी, डॉ. धृति ढोडियाल, डॉ. मधु बिष्ट, साकेत उनियाल एवं डॉ. राजेश भट्ट कई शामिल रहे।
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