बॉलीवुड में अलग पहचान रखने वाले अभिनेता, थियेटर आर्टिस्ट, टीवी प्रेजेंटर और निर्माता विनय पाठक ने कहा कि युवा पीढ़ी में कुछ कर गुजरने की क्षमता है। वह देश से जाति-धर्म के भेदभाव को मिटाने की ताकत रखती है।
साहित्य, कला को प्रदर्शित करने का भी एक मंच
देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करने के लिए दून पहुंचे अभिनेता विनय पाठक ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस तरह के फेस्टिवल उत्सव मनाने के अवसर हैं। यह प्रतिभा दिखाने के लिए लोगों को मंच उपलब्ध कराने का एक जरिया है। इतना ही नहीं यह साहित्य, कला को प्रदर्शित करने का भी एक मंच है।
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कहा कि फेस्टिवल के जरिए समाज के साथ संवाद करने का मौका मिलता है। बदलते सिनेमा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि परिवर्तन समाज का नियम है। समय के साथ-साथ सभी में बदलाव आता है। दर्शकों के स्वाद के अनुसार ही फिल्में व वेब सीरीज बनाई जा रही हैं।
उन्होंने उत्तराखंड की जनता से अपील करते हुए कहा कि देश में अमन चैन बनाए रखने के साथ एक-दूसरे से मोहब्बत करें। देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन उनकी फिल्म 'बिट्टू का जन्मदिन' दिखाई जाएगी।
गढ़वाली खाने की तलाश में हैं विनय
दून आने के बाद से बॉलीवुड अभिनेता विनय पाठक गढ़वाली खाने की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि गढ़वाली खाने का उन्हें बेसब्री से इंतजार है। दून में वह जरूर गढ़वाली खाना खाएंगे।
सफलता का कोई मंत्र नहीं होता
अभिनेता विनय पाठक ने कहा कि सफल होने का कोई मंत्र नहीं होता। बिहार के छोटे शहर के विनय ने कहा कि सफलता छोटे-बड़े शहर को देख कर नहीं मिलती। मन से मेहनत करने वाले व्यक्ति को जीवन में सफलता जरूर मिलती है।
विनय की फिल्मों को सिनेमाघर खुलने का इंतजार
करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके विनय पाठक की आगामी फिल्मों को देशभर में पूरी तरह से सिनेमाघर खुलने का इंतजार है। उनका अभिनय बेहद सहज और नैसर्गिक दिखाई देता है। उनका हर किरदार अलग छाप छोड़ जाता है। उन्होंने बताया कि उनकी चार फिल्में बनकर तैयार हैं। पूरी तरह से सिनेमाघर खुलने के बाद उन्हें रिलीज किया जाएगा।