‘अरे भाई, हमारी कार तो ले ली। अब उसकी (दूसरे अधिकारी) कार भी तो लो। जब हमें परेशान किया है तो उसे भी करो...।’ यह कहना है एक ऐसे अधिकारी का, जिनकी सरकारी कार डीएम के आदेश के बाद पंचायत चुनाव के लिए अधिग्रहीत कर ली है। संभागीय परिवहन अधिकारी के पास इन दिनों इस तरह की कई कॉल आ रही हैं।
इन दिनों परिवहन विभाग विभिन्न विभागों से वाहनों का अधिग्रहण कर रहा है। डीएम ने विभाग को 350 कार जुटाने का आदेश दिया है।
आदेश के मुताबिक हर विभाग के विभागाध्यक्ष को अपनी गाड़ी अनिवार्यत: देनी है। पहले तो अधिकतर अफसर आनाकानी करते रहे, लेकिन डीएम ने सख्ती दिखाई तो परिवहन विभाग को कारें मिलने लगीं। अब कार गवांने वाले अफसर ही आरटीओ को उन अफसरों की जानकारी दे रहे हैं, जिनकी गाड़ी ली जा सकती है।
शुक्रवार को ऐसे अफसरों ने आरटीओ कार्यालय में अफसरों को फोन कर एक-दूसरे की जानकारी दी। अफसरों की यह मुखबिरी परिवहन विभाग के लिए मददगार साबित हो रही है। जानकारी मिलने के बाद विभाग संबंधित अधिकारियों की कार ले रहा है।