प्रदेश के परिवहन विभाग के लिए यह साल 2021 मिलाजुला रहा। एक ओर जहां परिवहन विभाग ने चेकपोस्ट बंद करने जैसे अहम फैसले लिए तो दूसरी ओर परिवहन निगम को यूपी से परिसंपत्तियों के हिस्से की रकम मिली, जो कि राज्य स्थापना के बाद से ही अटकी हुई थी। उधर, विभाग परिवहन कारोबारियों की लगातार मांग के बावजूद इस साल किराया बढ़ोतरी पर कोई निर्णय नहीं ले पाया।
परिवहन निगम को मिला हक
राज्य गठन के दो दशक बाद उत्तराखंड परिवहन निगम को परिसंपत्तियों के बंटवारे पर 205 करोड़ का हक मिला। दरअसल, उत्तराखंड बनने के बाद वर्ष 2003 में परिवहन निगम का गठन हुआ था। इसके बाद से ही लगातार परिसंपत्तियों के बंटवारे का मुद्दा चलता आ रहा था। उत्तराखंड परिवहन निगम की चार बड़ी परिसंपत्तियों में से बंटवारे का हिस्सा लेने के लिए कई बार बैठकें हुईं लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकला था।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी की बैठक में यह हक मिला। इसके मुताबिक, नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड गठन और अक्तूबर 2003 में उत्तराखंड परिवहन निगम गठन के बीच उत्तराखंड में संचालित निगम की बसों का यूपी परिवहन निगम के पास जमा 50 करोड़ टैक्स देने पर सहमति बनी। यूपी ने 205 करोड़ रुपये यूपी, दिल्ली की चार परिसंपत्तियों के बदले में दी।
किराये पर नहीं हो पाया फैसला
परिवहन विभाग में सबसे बड़ा मुद्दा किराया बढ़ोतरी का रहा। कोविड काल में संचालन ठप होने से परेशान परिवहन कारोबारियों ने लगातार दबाव बनाया तो परिवहन मुख्यालय ने किराया बढ़ोतरी को समिति का गठन कर दिया। समिति ने रिपोर्ट दी जो कि राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में भी रखी गई। बाद में कुछ आपत्तियों के चलते इस पर निर्णय नहीं लिया गया। इसके बजाए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति की अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। लिहाजा, इस साल अब तक किराया बढ़ोतरी पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
परिवहन विभाग ने बंद कर दिए सभी चेकपोस्ट
आमतौर पर परिवहन कारोबारियों के लिए आरटीओ चेकपोस्ट बेहद अहम होता था। टैक्स जमा करना हो या प्रवर्तन का काम हो, परिवहन विभाग के लिए भी यह चेकपोस्ट अहम होते थे। इस साल एक दिसंबर से परिवहन विभाग ने प्रदेशभर के अपने सभी चेकपोस्ट बंद कर दिए हैं। इसकी जगह अब एएनपीआर और आईपी इनेबल्ड कैमरे लगाए जा रहे हैं। अत्याधुनिक तरीकों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों की जांच होगी और उनके खिलाफ ऑनलाइन प्रवर्तन की कार्रवाई होगी।
पैनिक बटन को प्रेशर का इंतजार
दरअसल, सरकार ने सभी सार्वजनिक यातायात वाहनों में महिला सुरक्षा के मद्देनजर पैनिक बटन लगाने के आदेश दिए। इसके तहत टैक्सी और अन्य वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी बिना पैनिक बटन नहीं होता है। पैनिक बटन के हिसाब से अत्याधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित होना था जो कि पुलिस के समन्वय से काम करता। साल बीत गया लेकिन विभाग इस कंट्रोल रूम को स्थापित नहीं कर पाया। अभी कामचलाऊ व्यवस्था के तहत पैनिक बटन चल रहा है।