उत्तराखंड में टिहरी-पौड़ी जिले की सीमा को जोड़ने वाले जानकी सेतु पुल का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 20 नवंबर को लोकार्पण किया था। इससे ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम और परमार्थ निकेतन यात्री आसानी से जा सकेंगे। इस पुल के बनने से रामझूला पुल पर दबाव भी कम होगा।
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इस मौके पर सीएम त्रिवेंद्र ने कहा कि इस पुल के खुलने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सहूलियत होगी। गौरतलब है कि वर्ष 2006 में मुनिकीरेती पूर्णानंद से स्वर्गाश्रम वेद निकेतन के लिए गंगा के ऊपर लगभग 49 करोड़ की लागत से करीब 346 मीटर लंबे जानकीसेतु स्वीकृति हुआ था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण तिवारी ने इसका शिलान्यास किया था। इसके बाद यहां झूला पुल के बजाय मोटर पुल की संभावनाएं तलाशी गई, इस कवायद में छह साल का समय निकल गया। वर्ष 2012 में शासन से यहां थ्री-लेन ब्रिज निर्माण की स्वीकृति मिली।
25 मार्च 2013 को इसके लिए शासनादेश जारी कर धन आवंटित भी कर दिया गया। करीब सात साल बाद पुल बनकर तैयार हुआ। पुल के लोकार्पण अवसर पर नरेंद्रनगर विधायक कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी सहित कई लोग उपस्थित थे।
थ्री लेन जानकी झूला पुल एक नजर में...
- सेतु की कुल लंबाई - 346 मीटर
- सेतु का मुख्य स्पान - 274 मीटर
- सेतु की चौड़ाई - 3.90 मीटर
- दाई ओर से एप्रोच रोड- 24 मीटर
- बाईं ओर से एप्रोच रोड- 48 मीटर
- सेतु के टावर की ऊंचाई- 30 मीटर
- सेतु की सुरक्षा जाली की ऊंचाई - 2.10 मीटर
- सेतु के चौड़ाई के तीन भाग- 2 गुणा 1.20 मीटर और 1.50 मीटर
- स्वीकृति वर्ष -2013
- पुनरीक्षत स्वीकृत वर्ष -2018
- कुल लागत- 48.85 करोड़