विधानसभाओं की समीक्षा के क्रम में उत्तराखंड के सीएम ने कुमाऊं के तीन मंत्रियों को बुलाया था।
हल्द्वानी विधायक इंदिरा हृदयेश और लालकुआं के प्रतिनिधि मंत्री हरीश दुर्गापाल समीक्षा बैठक में शामिल हुए। जबकि नाराज बताए जा रहे बाजपुर से विधायक और तीसरे मंत्री यशपाल आर्य बैठक में नहीं आए।
उनकी गैरहाजिरी का कारण अपने विधानसभा क्षेत्र में खनन के मामले पर सीएम के खासमखास और औद्योगिक सलाहकार रंजीत रावत से पिछले दिनों हुई कहासुनी से आहत होना बताया गया है।
हालांकि सीएम हरीश रावत का कहना है कि यशपाल आर्य की विधानसभा की समीक्षा गुरुवार को नहीं होनी थी। जबकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आर्य को बैठक में पहुंचना तो था, लेकिन आईफ्लू से पीड़ित होने के चलते उन्होंने सीएम से बात कर बैठक में पहुंचने पर असमर्थता जताई थी।
गुरुवार को भी मंत्री यशपाल आर्य के दोनों मोबाइल नंबर बंद थे। आर्य के हल्द्वानी बंगले से बताया गया कि साहब परिवार सहित राज्य से बाहर गए हैं।
उनकी नाराजगी और इस्तीफे की पेशकश की खबरों के बाद भी उनकी ओर से कोई खंडन या फिर जानकारी नहीं दी गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री हरीश रावत इस तरह की खबरों को पूरी तरह भ्रामक और गलत ठहरा रहे हैं।
उन्होंने समीक्षा बैठक में नहीं पहुंचने के बाबत बताया कि गुरुवार को उनकी विधानसभा की समीक्षा नहीं होनी थी।
स्मार्ट सिटी को लेकर उत्तराखंड सरकार सक्रिय
देश भर में बनने वाले स्मार्ट सिटी को लेकर उत्तराखंड सरकार भी सक्रिय हो गई है। स्मार्ट सिटी को लेकर देर रात तक चली बैठक में सीएम ने सुझाव दिया कि देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश-मसूरी तथा हल्द्वानी-रामनगर-अल्मोड़ा-नैनीताल और टिहरी-चिन्यालीसौण-चौखुटिया-गैरसैण आदि को भी चिंहित किया जा सकता है।
सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की देशभर में सौ स्मार्ट सिटी बनाए जाने की योजना है। इसके लिए सभी राज्यों के प्रस्ताव भेजे जाने हैं। उत्तराखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान है, इसी को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्ताव तैयार किए जाएं।
सीएम ने कहा कि कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक मिशन डायरेक्टर नियुक्त किया जाए। एक अलग से पीएमयू गठित किया जाए, ताकि डीपीआर आदि कार्य समय से पूरा हो सके। स्मार्ट सिटी से लिए अलग-अलग आइडिया पर प्रस्ताव तैयार किया जाए।
सात दिन में तैयार होगा शहरी विकास का ढांचा
सीएम ने कहा राज्य जिस पर प्रकार से आबादी का दबाव शहरी क्षेत्रों में बढ़ रहा है, उसको देखते हुए शहरी विकास व आवास विभाग अपने स्तर पर सर्वे कराकर राज्य स्तर पर 100 मिनी कस्बे चिंहित करें, जो भविष्य में शहर का रूप लेने वाले हैं। ऐसे कस्बों में सभी आधारभूत सुविधाएं विकसित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में जो प्राधिकरण है, वे प्रोमोशनल व डेवलमेंटल गतिविधियां भी बढ़ाये। शहरी क्षेत्रों में जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। इसके लिए नगर पालिकाओं के ईओ को जवाबदेह बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए अभी से कार्ययोजना तैयार कर कार्य शुरू करना होगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहरी विकास का ढांचा अगले सात दिन में तैयार हो जाना चाहिए।
बैठक में शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार, मुख्य सचिव नागराजन रविशंकर, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ओमप्रकाश, सचिव शहरी विकास डीएस गर्ब्याल, प्रभारी सचिव एवं उपाध्यक्ष एमडीडीए. आर.मीनाक्षी सुंदरम, अपर सचिव शहरी विकास राधिका झा आदि मौजूद थीं।