जन्म से मुड़े पैरों (क्लब फुट) वाले बच्चों का केवल कुछ माह उपचार कर उन्हें जीवनभर की विकलांगता से बचाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ऐसे बच्चों का निशुल्क उपचार किया जाता है। प्रदेश में इस तरह की परेशानी से ग्रस्त बच्चों का निशुल्क उपचार हो सकेगा।
शनिवार को चंदरनगर स्थित संभागीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण केंद्र सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित कर ऑर्थोपेडिक सर्जनों को इस संबंध में जानकारी दी गई। सचिव स्वास्थ्य भूपेंदर कौर औलख ने कहा कि क्लब फुट जैसी विकृति के उपचार के संबंध में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
विशेषज्ञ डा. मैथ्यू वर्गीज, एम्स दिल्ली के डॉ. शाह आलम खान, डॉ. संतोष जॉर्ज और डा. आरसे इका ने बताया कि हर साल देश में करीब 50 हजार बच्चे इस विकृति के साथ पैदा होते हैं। प्रत्येक एक हजार में से दो बच्चों में यह विकृति सामान्य तौर पर पाई जाती है। उत्तराखंड में प्रत्येक वर्ष करीब 400 बच्चों के इस विकृति के साथ जन्म लेने का अनुमान है।
बताई उपचार की विधि
उन्होंने बताया कि बच्चों का उपचार पोंटेसी पद्धति से किया जाएगा। इसमें बच्चे को हर सप्ताह नया प्लास्टर लगाया जाता है। चार से सात हफ्ते तक बच्चे को लगातार प्लास्टर लगाकर उसकी हड्डियों को सीधा करने की कोशिश होती है। इसके बाद बच्चों को करीब तीन साल तक के लिए विशेष जूता पहनने के लिए दिया जाता है।
शिविर में करीब एक दर्जन बच्चों के पैरों पर डेमो के लिए प्लास्टर लगाया गया। अलग-अलग हिस्सों से आए क्लब फुट पीड़ित बच्चों को प्लास्टर चढ़ाकर जानकारी दी गई। इस अवसर पर केंद्र के प्राचार्य डॉ. केके टम्टा, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. आरएस पाल, डॉ. वाईके थपलियाल समेत अन्य ऑर्थोपेडिक सर्जन मौजूद रहे।
इन अस्पतालों में होगा इलाज
योजना के तहत फिलहाल 10 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। यहां मरीजों को निशुल्क उपचार मिल सकेगा। डीईआईसी, कोरोनेशन अस्पताल, देहरादून। डीईआईसी, संयुक्त अस्पताल, रुड़क। डीईआईसी, बेस अस्पताल, अल्मोड़ा। डीईआईसी, बेस अस्पताल, हल्द्वानी। सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी। डीएच उत्तरकाशी। मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर गढ़वाल। जिला अस्पताल चमोली। जिला अस्पताल, पिथौरागढ़ और एम्स ऋषिकेश।