उप महाप्रबंधक मनीष गोयल ने बताया कि शुरुआत में प्लांट से लाकर डीसीयू (डी कंप्रेशन यूनिट) से घरों की पाइपलाइन में गैस डाली जाएगी। बाद में पूरा सैटअप होने के बाद सीधे पाइपलाइन के जरिये पीएनजी की सप्लाई की जाएगी।
एलपीजी की तुलना में पीएनजी से होगी 10 प्रतिशत बचत
उप महाप्रबंधक मनीष गोयल ने दावा किया कि एलपीजी की तुलना में पीएनजी से 10 प्रतिशत बचत होगी। कनेक्शन लेने पर शुरुआत में चार से पांच हजार रुपये देने होंगे। दो महीने में एक बार बिल आया करेगा। बिल के लिए अलग से मीटर लगेगा।
कंट्रोल रूम का जारी होगा नंबर
कार्यालय खुलने के बाद आम लोगों के लिए कंपनी की तरफ से कंट्रोल रूम का नंबर भी जारी किया जाएगा। किसी भी प्रकार की समस्या, नए कनेक्शन आदि के लिए लोग इस नंबर पर फोन कर सकेंगे। शुरुआती चरण में गैस पाइप लाइन डलने के बाद कार्यालय में ही बैठकर कंपनी के अधिकारी बाकी शहर में इसका जाल बिछाने के लिए योजना भी बनाएंगे।
पाइप लाइन सुरक्षित, प्रदूषण कम
सिलेंडर की गैस हवा से भारी होती है, इसलिए वह लीकेज होने पर आसपास फैल जाती है, लेकिन प्राकृतिक गैस हवा से हल्की होती है। लीकेज होने पर यह हवा में ऊपर चली जाती है, इसलिए दुर्घटना की आशंका कम होती है। इसके जरिये गृहणियों को काफी लाभ पहुंचेगा। प्राकृतिक गैस प्रदूषण को रोकने में सकारात्मक पहल है।
इन तीन विकल्पों के जरिये ले सकेंगे लाभ
पहला विकल्प : इसमें कनेक्शन के लिए सिक्योरिटी के लिए निर्धारित पांच हजार रुपये रुपये में एक हजार की छूट दी जाएगी। वहीं, गैस खपत के लिए 500 रुपये (रिफंडेबल) सिक्योरिटी डिपोजिट देना होगा।
दूसरा विकल्प : इसमें बिल के साथ प्रतिदिन के हिसाब से पांच रुपये 1000 दिन तक देना होगा। जो कनेक्शन बंद करते समय वापस हो जाएगा। इसके अलावा 500 रुपये (रिफंडेबल) देने होंगे।
तीसरा विकल्प : इसमें बिल के साथ प्रतिदिन के हिसाब से एक रुपया लिया जाएगा। इसमें धनराशि रिफंडेबल नहीं होगी। इसके अलावा 500 रुपये (रिफंडेबल) देने होंगे।
पीएनजी के फायदे
- 24 घंटे आपूर्ति, गैस उपयोग की कोई सीमा नहीं।
- हवा की तुलना में हल्की होने से उपयोग में सुरक्षित।
- कम वजन वाले सिलिंडरों की परेशानी नहीं, चोरी संभव नहीं।
- बुकिंग में परेशानी नहीं।
- पर्यावरण के अनुकूल और किफायती।
- उपयोग के बाद भुगतान, बिलिंग हर दो महीने में।