देहरादून में फर्जी बाबाओं, तांत्रिकों के सताए लोगों का अपनी पीड़ा साझा करने का सिलसिला बुधवार को भी खूब चला।
हैरत की बात यह कि ऐसे बाबाओं का शिकार बनने वालों में पीएचडी, एमबीए डिग्री होल्डर तक शामिल थे। ऐसे लोगों ने अपनी व्यथा तो बताई, लेकिन अपने नाम गुप्त रखने की गुजारिश भी ताकि किसी की हंसी के पात्र न बनें। व्यथा बताने का उद्देश्य यह था ताकि दूसरे इस तरह के जाल में न फंसे...।
बाबा के विज्ञापन में दिखी आस
माधवी (बदला हुआ नाम) ऐसे ही लोगों में शुमार हैं। ओल्ड डालनवाला की रहने वाली माधवी पीएचडी डिग्री होल्डर हैं। कई साल शिक्षिका भी रही हैं।
तंत्र-मंत्र पर उन्हें भरोसा नहीं था, लेकिन जब बेटे की आवारगी से तंग आईं तो उन्हें हर तरह की समस्या दूर करने का दावा करने वाले एक बाबा के विज्ञापन में ही आस दिखी।
माधवी ने बाबा को फोन किया, जिन्होंने अपना अकाउंट नंबर बता उसमें पांच हजार रुपए डालने को कहा। समस्या कैसे दूर होगी पूछने पर बाबा ने कागज पर बेटे का नाम लिख, उसके नाम से पूजा करने की बात कही।
24 घंटे के भीतर बेटे का आचरण सुधर जाने का दावा किया। माधवी ने काम न होने पर पैसे वापसी की बाबत पूछा तो बाबा ने तल्ख अंदाज में जवाब दिया...आपके पांच हजार रुप, से मैं करोड़पति नहीं बन जाऊंगा। माधवी आश्वस्त हो गईं।
पैसा बाबा के अकाउंट में चला गया, लेकिन उसके बाद से बाबा भी गायब हो गए। इस वाकये के बाद से माधवी का भरोसा बाबाओं पर से पूरी तरह उठ चुका है। वह दूसरों को भी इनके झांसे में न आने की सलाह देती हैं....।
पल में बदलता है अकाउंट
बाबाओं का अकाउंट पल-पल में बदल जाता है। उन्हें काम की जल्द कराने की इच्छा रखने वाले ग्राहकों से अपने अकाउंट में पैसा डलवाने की इतनी जल्दी होती है कि वह ग्राहक से पूछते हैं-सबसे नजदीकी बैंक कौन सा है?
अगर वहां बाबा जी का खाता नहीं होता तो वह महज पांच मिनट बाद पलटकर फोन कर उस बैंक का नाम और अकाउंट नंबर बता देंगे, ग्राहक जिसके नजदीक मौजूद हो। यह बात अलग है कि हर खाता अलग-अलग नाम से खोला गया होता है।